Home धर्म हे प्रभु ! ऐसी प्यास जगा दो, कुकर्मों से बचता रहूँ !

हे प्रभु ! ऐसी प्यास जगा दो, कुकर्मों से बचता रहूँ !

0 second read
0
0
1,164

हे  प्रभु  !  ‘बाहर  मस्तक   न  झुके’ , ‘अंदर  का  अहंकार   टूट   जाए’ ,

‘बाहर  कहीं  हाथ  न  फैलाना  पड़े’ , ‘अंदर  का  संकल्प   उदय  हो  जाए’ ,

‘मन   में   शांति   हो ‘ , ‘धर्म-अधर्म   का  ज्ञान   अपना  प्रकाश   फैलाये ‘,

‘कुकर्मों   से   सदा   ही   बचता   रहूँ’  , ‘ऐसी    प्यास  जगा   दो  मन   में ‘  |

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In धर्म

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…