Home ज़रा सोचो हमारा देश –एक कटाक्ष -अच्छे दिन कब आएंगे ?

हमारा देश –एक कटाक्ष -अच्छे दिन कब आएंगे ?

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हम देश के सभ्य नागरिक हैं , जागरूक हैं , सरकार से सीधे प्रश्न करते है ,

‘अच्छे दिन कब आएंगे ? ज़रा हमें पहचानिए :-

1 हम कामचोर कर्मचारी हैं , बिना कुछ करे सब कुछ चाहिए |

2 हम देश में नित नए घोटाले करते हैं |

3 दिन- रात सरकारी टैक्सों की खूब चोरी करते हैं |

4 देश की जरूरत पर भी गद्दारी करने से नहीं चूकते |

5 काम पर देर से पहुंचाना , जल्दी भाग जाना , अपना अधिकार समझते हैं |

6 देश को उन्नति पर ले जाने वाले हर कानून की धड़ल्ले से धज्जियां उडाते हैं |

7 हर खरीद-बेच पर कमीशन खाते हैं |

8 हम स्वच्छता को अपने जीवन का अभिशाप मानते हैं |

9 सड़क के नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करते है |

10 दिन-रात बिजली की चोरी करते है |

11 कचरा सही जगह पर नहीं रखते , यहाँ- वहाँ फैक देते हैं |

12 चलती सड़क हो या रेल , बहन-बेटियों को छेडते हैं , वीभत्स कांड करने से नहीं डरते |

13 हम बेशर्मी के साथ दीवारों पर लिखते रहते है और पेशाब भी करते हैं |

14 राष्ट्र -गान के समय भी बैठे रहते है , इधर-उधर की हाँकते रहते हैं |

इतना सब कुछ करके भी अच्छे- दिन नहीं आते | आप ही बताओ

ऐसा कौन सा फार्मूला ईज़ाद करूँ या इससे ज्यादा अच्छे व्यवहार क्या करूँ ?

धन्यवाद |

मैं हूँ —- अपने प्यारे देश का एक आम नागरिक |

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