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“ मन  की  चंचलता को  योग-वैराग्य  व  द्रढ़  इच्छा  शक्ति  से  रोका  जा  सकता  है |

जिससे  अपने  मन  को  वश  वश  में  कर  लिया ,  तो   समझो  उसने   दुनियाँ   पर

विजय  प्राप्त   कर  ली   है  “|

 

 

 

सतोगुण , रजोगुण , तमोगुण

“ सतोगुणी  मनुष्य सदा  परहित  के  कार्य  करता  है ,रजोगुणी  प्राणी  केवल  अपने

स्वार्थ  तक  सीमित  हो कर  रह  जाता  है , तथा  तमोगुणी   प्राणी  सृष्टि  के  विनाश

का  कारण  बनता  है  ” |

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