Home कविताएं ‘सुविचार करें , आनंद लें जीने का ” !

‘सुविचार करें , आनंद लें जीने का ” !

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[1]

‘हर घर में ‘रायसिंह’ और ‘ज्ञानसिंह’  मिल  जाएंगे’ ,
‘ मंगतेराम’  भी  अपनी  चादर  बिछाए  मिलते  हैं ‘
‘सुखदेवी’ व ‘शांतिदेवी’ ‘अब  ढूँढे  भी  नहीं मिलती’ ,
ऐखुदा,’कलियुग का अंत कहाँ होगा ,कुछ  तो  बता’ ?

[2]

‘गलतफहमी मत पालो ‘,’आसपास के  वातावरण  को  खँगालो ‘,
‘घर  को  स्वर्ग  बनाने  से  पीछे  मत  हटो’ ,’हीरा  तलाश  करो ‘|

[3]

‘उपवास’ स्वम की शुद्धि का संस्कार मात्र है’ ,’प्रभू को खुश करने का मन्त्र नहीं’,
‘आधी दुनियाँ आज भी भूखी सोती है’,’बेहद दुखी है ,शांति दूर तक नहीं मिलती ‘|

[4]

‘जब ज़िम्मेदारी  निभाने को  तैयार हो’ ‘तकलीफ’उठाने  को  भी  तैयार रहो’, 
‘या  तो  सीख  जाओगे  या  जीत  जाओगे” पलड़ा  तुम्हारा  ही  भारी  रहेगा’|

[5]

‘गांठ  का  पैसा’ और ‘खुद  की  अकल’,’सबका  बेड़ा  पार  करती  है ‘,
‘एक  चवन्नी  जेब  में  न  हो  तो ‘,’ दो  कदम  बढ़ाना  भी  भारी  है  ‘|

 

 

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