Home कविताएं प्रेरणादायक कविता ‘सपने सच न हों’ तो ‘रास्ते बदलो’ ‘सिद्धांत नहीं ‘

‘सपने सच न हों’ तो ‘रास्ते बदलो’ ‘सिद्धांत नहीं ‘

0 second read
0
0
1,376

*कामयाब’ व्यक्ति की* *सिर्फ ‘चमक’ लोगों को* *दिखाई देती है*।

*उसने  कितने  ‘ अंधेरे ‘ देखे  हैं , ** यह  कोई  नहीं  जानता..*

*यदि सपने  सच नहीं  हो  तो**रास्ते बदलो..सिद्धान्त नहीं*।

*क्योंकि*  *पेड़   हमेशा   पत्तियाँ   बदलते   हैं…**जड़ें  नहीं * *

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In प्रेरणादायक कविता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…