Home कविता ‘शांति-प्रिय’ रहने की तमन्ना है मेरी !

‘शांति-प्रिय’ रहने की तमन्ना है मेरी !

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‘ऐ  जिंदगी’ !’ सभी  झंझावटों  को  त्याग’ , ‘शांति-प्रिय  रहने  की  तमन्ना   है’ ,

‘आखिरी  सांस   तक  यही  कवायद  जारी  है’,’तू  भी  रहम-दिल  हो  जा  ज़रा ‘ |

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