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‘राम के किरदार में’ ‘ इतना दिव्य प्रकाश ‘ है , ‘युग आए युग गए’

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‘राम के किरदार में’ ‘ इतना दिव्य प्रकाश ‘ है , ‘युग आए युग गए’ ,
‘इंसान की इच्छाएं अनिच्छाएं ‘ , ‘ धरती- आसमान बनाते रहे ‘ ,
‘मर्यादा पुरषोत्तम राम’ ,’ हमेशा भारतीय चिंतन ‘ की ‘ धारा के महानायक रहे’ ,
‘मर्यादा की जो लकीरें’ ‘युगों पहले खींची थी’ ,’आज स्वर्ण-रेखा की भांति चमकती हैं ‘ |

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