Home धर्म मुस्लिम समाज को सही पहलुओं को स्वीकारना चाहिए !

मुस्लिम समाज को सही पहलुओं को स्वीकारना चाहिए !

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“शरीयत  में  तीन  माह  में  तीन  बार  तलाक  कह  कर’ ‘पत्नी  को  छोड़  सकते  हो’ ,

‘जो  बिगड़ते- बिगड़ते ” एक  बार  में  ही  तीन  बार  तलाक  बोलने  में ” बदल  गया , 

‘अब  ‘धर्म’,’देश’,’काल’ के  अनुसार  ‘कानून  में   संशोधन’  ‘आज  की  ज़रूरत है”,  

‘इंसानियत  के  खिलाफ  कुरीतियों  का  चलन’ ,देश से  हर हाल में  बंद होना चाहिए’ ,

‘कुरान  शरीफ  में  ही’ ‘तलाक’,’विधवा  विवाह’,’संपत्ति  में हक़’ का ‘पूरा विधान  है’  ,

‘मुस्लिम समाज को प्रगतिशील समाज के’ ‘सही पहलुओं को स्वीकार करना चाहिए’  |

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