Home कविताएं देशभक्ति कविता ‘देश को ‘मोदी-योगी जुगलबंदी’ की ‘भारी ज़रूरत है’ |

‘देश को ‘मोदी-योगी जुगलबंदी’ की ‘भारी ज़रूरत है’ |

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‘अपनी   आत्मा   को    बेचने   की ‘ ‘ ललक    अभी   तक    अधूरी   है’  ,

‘इस   देश   के   पतन   का   सिलसिला’ ,  ‘ कुछ   और   चलना   चाहिये’  ,

‘गद्दारों  से  भरा  है  देश  अपना ‘,’चाँदी की चमक ‘ के ‘जौहरी  घटते  नहीं’ ,

‘अब   तो   ‘मोदी- योगी ‘ जुगल- बंदी   की ‘ ‘, ‘देश   को  भारी  जरूरत   है ‘ |

 

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