Home कविताएं उदासी की कविताएँ “जरा सोचो ” कुछ छंद !

“जरा सोचो ” कुछ छंद !

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[1]

दोस्तों सोचने का ढंग बदलना होगा “:-
हमें सोचने का ढंग बदलना होगा’ ,’ सुचिता का परिचय देना होगा ‘,
”मेरे साथ धोखा हुआ ‘ ‘यह पकड़ कर बैठ गए’ ,’ संबंध बिगाड़ लिए ‘,
‘आक्रोश से ऊर्जा नष्ट होती है’,’खुद के बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ता है’ ,
‘विश्वास का पौधा लगाओ’ ,’ हमारा दर्द धीरे-धीरे घटता चला जाएगा’ ,
‘अपने भीतर ही गोता लगाना है’,कमी ढूंढनी है,’ भटकने से बचना है’ ,
‘मन बहानेबाजी करेगा’,’कठिनाई पैदा करेगा’,’अड़ियल घोडा बना रहेगा’ ,
‘विवेक व विचारों का चाबुक लगा’,’ सुख के सूखे श्रोत को हरा भरा बना’ ,
‘सुंदरता से जीने का भाव’ ‘तुझमें भरा है’,’ दिल बड़ा करके दिखा सबको’ |

[2]

“कुछ उन्नति करनी है’ तो एक “संकल्प” ही काफी है” ,

“अगर बिखरना है ” तो ” विकल्प ” भी ” अनेकों हैं “|
[3]
“तुम्हें इस्तेमाल करने वाले” ” हर नुक्कड़ पर मिल जाएंगे” ,
“तुम्हारा ख्याल रखने वालों को” “ढूंढते रह जाओगे जनाब” |
[4]
“चाहे किसी के लिए जान लगा दो” “,जब तक काम आओगे”,”जुड़े रहेंगे” ,
“जिस दिन काम नहीं आए” ,”या ढील कर दी” ,” पीछे हट जाएंगे सभी” |
[5]
आदमी की आँख में क्या है जो दूसरों में कमी और अपनी विशेषता देखता है ,
हर समझदार से पूछ लो , दूसरों की कमी का उल्लेख करने से नहीं चुकता ,
वह सौभाग्यशाली प्राणी है जिसको सभी व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न कहते है ,
वह समभाव में होता है , संसार की किसी विधा का कोई असर नहीं होता ” |
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