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जप, ध्यान ,पुजा पाठ कभी तो करो —

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“जप” ,”ध्यान”, “पूजा,पाठ” , सिर्फ ” निष्काम भाव ” से करो ,
“स्तुति” ,”प्रार्थना”, “नमस्कार” मे , “भक्ति” और “श्रद्धा” ज़रूरी है ,
“कार्य करते” “गल्ती ” हो जाए,” पश्चाताप की अग्नि “मे “जलो” ,
“प्रभु” ” बड़े दयालु ” हैं , “सहजता” से “तुझे” “अपना बना लेंगे” |

 
 “भगवान राम” “सम ” “हितैषी”, “कोई नहीं ” “संसार में “,
“समर्पण ” करके ” देख”, “सब कुछ ” ” बदल जाएंगा तेरा ” |
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