Home कहानी प्रेरणादायक कहानी खुशियाँ बांटने से मिलती हैं , मंदिर मे नहीं

खुशियाँ बांटने से मिलती हैं , मंदिर मे नहीं

0 second read
0
0
1,294

(((( “एक सुन्दर ~ प्रसंग” )))))*
::
एक बच्चा जला देने वाली गर्मी में नंगे पैर
गुलदस्ते बेच रहा था..
::
लोग उसमे भी मोलभाव कर रहे थे..
::
एक सज्जन को उसके पैर देखकर बहुत
दुःख हुआ, सज्जन ने बाज़ार से नया जूता
ख़रीदा और उसे देते हुए कहा :: “बेटा लो,
ये जूता पहन लो..!!”
::
लड़के ने फ़ौरन जूते निकाले
और पहन लिए..
::
उसका चेहरा ख़ुशी से दमक उठा था..
वो उस सज्जन की तरफ़ पल्टा –
और हाथ थाम कर पूछा : “आप भगवान हैं..??
::
“उसने घबरा कर हाथ छुड़ाया और कानों को
हाथ लगा कर कहा ~ “नहीं बेटा, नहीं..
मैं भगवान नहीं..!!”
::
लड़का फिर मुस्कराया और कहा,
तो फिर ज़रूर भगवान के दोस्त होंगे..??
::
क्योंकि मैंने कल रात भगवान से कहा था कि
मुझे नऐ जूते दे दें…
::
वो सज्जन मुस्कुरा दिया और उसके माथे को
प्यार से चूमकर अपने घर की तरफ़ चल पड़ा..!!
::
अब वो सज्जन भी जान चुके थे कि भगवान का
दोस्त होना कोई मुश्किल काम नहीं..!!
खुशियाँ बाटने से मिलती है ~ मंदिर में नहीं..!!
. *?::”जय श्री कृष्ण”::?*

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In प्रेरणादायक कहानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…