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“कुछ हमारी कुछ तुम्हारी ” जरा सोचिए जनाब !

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“असफलताएँ बेहद रचनात्मक साबित हो जाती हैं” , ” बशर्ते  सोच  उत्तम  हो” ,
“धैर्यपूर्वक अपना उत्साह कायम रक्खें “, “कामयाबी स्वागत करेगी आपका ” |

[2]

यदि  जीवन में  कोई  विकृति , विकार  है” ,” तो  रोज़  प्रातः संकल्प  करो” ,
“दुर्गंध  नष्ट  हो  रही  है” ,”सदगुण  उदय हो  रहा  है” ,” मैं  सबल  प्राणी  हूँ ” ,
“आलस्य त्यागूंगा” “नशे से बचूँगा””क्रोध से बचूँगा””प्रेम व्यवहार करूंगा” ,
“भीतर ऊर्जाशक्ति बढ़ती जाएगी””इन विचारों को मुस्करा कर स्वीकारिए “|

[3]

“जो  मैंने  कहा  वो  होना  चाहिए  “, “अगर नहीं  तो  चिड  जाते  हैं” ,
“तुम्हारी बात हर हाल में स्वीकार करे” ,” कदापि  यह संभव  नहीं” ,
“क्रुद्ध होते ही छमता घटने लगती है”,”शांति के दरवाजे बंद होते हैं” ,
“एक दूसरे के काम को स्वीकार करें” ,” गल्ती  नज़र  अंदाज़  करें ” |

[4]

“अगर ‘दिशा’ और ‘उम्मीदें’ उचित हों “, “होंसलों को पंख लग जाते हैं”,
“जज्बा पैदा किए रक्खो “,” तुम्हें मंज़िल  कभी दूर दिखाई नहीं देगी ” |

[5]

“यह  शरीर  खाक का पुतला  है” ” एक दिन खाक में मिल जाएगा” ,
“तन की कीमत तभी है” “जब सद्भावना से कल्याण कार्यों में लगें” ,
“दूसरों  के रास्ते  में  काँटे बिछाता मानव” , “जानवर से बदतर है” ,
“वफादारी कहीं नज़र नहीं आती””अहसान फरामोशी है चारों तरफ ” |

[6]

“कहते हैं ‘नेकी कर  गड्ढे में  डाल” अहसान  तो कर  पर जता  मत  किसी  को “,
आह !’आदमी इतना गिर चुका हैं’ कि ‘नेकी करने वाले को कुओं में डाल देता है ,”
‘थोड़ी दौलत’, ‘थोड़ी शोहरत’ , ‘थोड़ी जायदाद’ और ‘थोड़ी ताकत चाहिए केवल’ ,
‘गद्दारी का यह आलम है’,’जिसकी बदौलत सब कुछ मिला’ ‘,उसी को डुबाता है’ |

[7]

“होठों  पर  हंसी  का  फ़ोहारा ‘,”बेहिसाब  बेसकीमती मान कर चलो “,
“रो-रो कर दुनियाँ बेहाल है”,” हंसी की जायदाद संभालता नहीं कोई” |

[8]

इंसान  का  जन्म  ले  कर  भी” ” इंसानियत नहीं जागी तेरी “,
“घोटाले पर घोटाले करके भी” ” पेट नहीं भरता तेरा जालिम “,
“गरीब  की  हाय  में  भी ” “अब बिल्कुल भी दम नहीं लगता” ,
“कलियुग की चरम सीमा””इंसानियत की गिरावट बताती है ” |

[9]

 

“जो पल पल रंग बदलते हैं “,”प्यार की हुंकार भरते हैं”,
“उन  बदरंगी  सियारों  से ”भगवान बचाए रखना मुझे |

[10]

“मूर्खों  से  तारीफ  सुन  कर” ” बुद्धिमान  माने  जा  रहे  हो  खुद  को ” ,
“मूर्ख बन कर बुद्धिमान  की शरण में आ जाते “” बुद्धिमान  कहलाते “|

[11]

” जितना  हमारे  पास  है  “,” सदा  क्यों  कम  आँकते  हैं  हम  सभी  ” ,
“क्यों नहीं सोचते जितना तुम्हारे पास है””करोड़ों तरसते हैं उसके लिए” |

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