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कुछ तुम’ ‘आगे बढ़ो’ ,’कुछ हम बढ़ें’ , ‘मिल कर काम ‘ करते हैं

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‘कुछ तुम’ ‘आगे बढ़ो’ ,’कुछ हम बढ़ें’ , ‘मिल कर काम ‘ करते हैं ,
‘नफरत के बीजों ‘ को ,’कमजोर लकीरों ‘ को ,’एकदिन’ ‘मिटा देंगे’ ,
‘ज़िंदगी का सफर ‘ ‘बहुत कठिन’ है , ‘ फिर भी सोच ‘ लेते हैं ,
‘अपनी-अपनी ‘ ‘कमियों को’ ‘ढूंढ कर’ ,’ द्रढ़ता से’ ‘मिटा देंगे’ |

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