Home कविताएं देशभक्ति कविता ‘कश्मीर’ , ‘कश्मीरी’ और ,’ कश्मीरियत ‘

‘कश्मीर’ , ‘कश्मीरी’ और ,’ कश्मीरियत ‘

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‘आज   सिर्फ   पाक   परस्त  परिंदों   के’   ‘पर   कतरने   की   ज़रूरत    है ‘,

‘कश्मीर  में’  ‘मजहब’ को  ‘औज़ार  बनाकर’  ‘खुरेजी  से  तरबतर  कराते हैं’ ,

‘अनुच्छेद’370’कश्मीर’,’कश्मीरी’ और ‘कश्मीरियत’का ‘बोलता दस्तावेज़  है’ ,

‘हुकूमत”उनकी  अपनी  होगी’ और  ‘हिफाज़त  हिंदुस्तान  की  सरकार  करेगी’  ,

‘पर  सियासतदानों  ने  इसे’  ‘दोज़ख  में  बदलने  में’  ‘कोई   कसर   नहीं  छोड़ी ‘,

‘रोज़   इस्लाम   के   नाम   पर   गजब ‘ ,  ‘अपनों   को   ही    हलाक   करते   हैं  |

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