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कभी न मन का दीप जलाया’ ,’ न राम का नाम लिया

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‘कभी न मन का दीप जलाया’ ,’ न राम का नाम लिया’ ,
‘न गुरु के चरणों मे बैठा’ ,’ न सत्संग का रंग चढ़ाया’ ,
‘चार चौरासी के चक्कर मे मैंने’ ,’अपना सारा जीवन गँवा दिया’ ,
‘देख बुढ़ापा’ ‘ समझ मे पाया’ , ‘अब चिड़िया चुग गयी खेत’ |

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