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” जरा सोचो ” ” कुछ सुविचारों “

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[1]

‘किसी  को  डसो  मत  मगर  फूँकारना  भूल  मत  जाना ‘,
‘मोम बेहद नरम होता है ,’उसे जलाने से रुकता नहीं कोई ‘|

[2]

‘राष्ट्रपति भवन में राजभाषा ‘हिन्दी’ की घोर अवहेलना होती है ‘,
‘सरकार की हिन्दी को बढ़ावा देने की बात खोखली ही लगती है ‘,
‘सभी  वेब – साइटों  को  द्विभाषी  बनाना  अनिवार्य  घोषित  है ‘,
‘अंधेरगर्दी यह  है की आज  भी कार्यालयों  में ‘अँग्रेजी’  भारी  है ‘|

[3]

‘प्रार्थना का मतलब याचना नहीं , आत्मा की सच्ची पुकार है ‘,
‘सब कुछ छोड़’ ‘ईश्वर पर भरोसे की भावना का फल ‘प्रार्थना’ है ‘,
‘प्रार्थना’ तो आत्मा का भोजन है ,ईश्वर का चिंतन है सर्वोपरि है ‘,
‘सुख-शांति का उत्तम साधन है , मन से न हो तो सब व्यर्थ है ‘|

[4]

‘जख्मों को दिल में छिपा कर ‘,;महफिल में रोज़ मुस्कराता हूँ ‘,
‘रोज़  नए जख्म  मिलते  हैं  कोई  कब  तक  रोये ,तू  ही  बता ‘|

[5]

‘अपनी कमियों को कम करता चल’ ,
‘सब का चहेता बन ‘,
‘चारों तरफ खुशियाँ बिखरी पड़ी हैं’ ,
‘कुछ को तो अपनाता चल ‘|

[6]

‘माना -हम मजबूत प्राणी हैं ‘,
‘लेकिन पत्थर क्यों समझते हो ‘?
‘वो -नित नई चोट देते गए ‘,
‘अहसास नाम की चीज नहीं ‘|

[7]

‘बातें  तो  बुरे  आदमी  भी  बड़ी  खूबसूरती  से  कर  जाते  हैं ‘,
‘अच्छे आदमी की पहचान बातों से नहीं’,’उसके सत्कर्मों से होती है ‘|

[8]

‘दिन की शुरुआत में लगता है’ ,
‘रुपया ही जीवन है ,तेजी से बढ़ें ‘,
‘लौटते समय थके होते हैं तो’ ,
‘शांति’ ही जीवन नज़र आता है ‘|

[9]

‘डाक्टर जीवन बचा सकता है’ ‘तो वकील जीवन का बचाव करता है ‘,
‘सैनिक’ शांतिपूर्ण जीवन देता है’ ‘ परंतु ‘प्रभु’ तो सब कुछ देता है ‘,
‘प्रभु’ से फिर भी विरक्ति ‘,’ खाली ढ़ोल बजा कर रिझाता रहता है ‘,
‘श्रद्धा और भक्ति’ से कोसों दूर’,’प्राणी की कलयुगी भक्ति को नमन ‘|

[10]

‘हम गल्ती पर गल्ती करते हैं फिर भी’ ,
‘गल्ती’ अपनी नहीं लगती ‘,
‘बनावट की चादर ओढ़ कर’ ,
‘दोमुखे चेहरे बनाए घूमते हैं हम ‘|

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