Home ज़रा सोचो ‘हमारे देश के कुछ हालात का मुजाहिरा पेश है ‘|’ जरा सोचिए ‘ |

‘हमारे देश के कुछ हालात का मुजाहिरा पेश है ‘|’ जरा सोचिए ‘ |

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‘ हमारे  देश  में ‘
‘आज  की  उभरती  तस्वीर  भारत  की , महाशक्ति  की  तस्वीर  नहीं  है,
‘यह  तो  एक  बेचैन, झगड़ालू  और  अविकसित  समाज  की  तस्वीर  है,
‘ भारत  को  खतरा  पड़ोसियों  से  नहीं, राजनीतिक  ध्रुवीकरण  से  है,
‘; बेझिझक  बीजेपी  को  उग्रता  पर, तुरंत  नियंत्रण  की  जरूरत   है,
‘स्टेट्समैन’ ही  देश  को ‘तनाव  और  टकराव’ के  कुए  से  निकाल  सकता  है,
‘असहमति  को  ‘गोली  या  हिंसा  से’  दबाने  का  प्रयास  सरासर  गलत  है,
‘प्रदर्शनकारियों  ने ‘ अपनी  बात  देश  में  पहुंचा  दी, अब  इंतजार  कीजिए,
‘सी ए ए  संसद  द्वारा  पारित  कानून  है, इसे  सरकार  कभी  वापस  नहीं  लेगी’ ।
[2]
हमारे  देश  की  वास्तविक  झांकी  प्रस्तुत  है ।-
(1)
‘जज  की  कुर्सी  से  2  मीट र दूर , पेशकार  रिश्वत  लेता  है ,
‘क्या  जज  को  पता  नहीं ? न्यायालय  गजब  का  है ।
(2)  देश  मे  नसबंदी  पर  15  सो  रुपए  और  बच्चा  पैदा  होने  पर  6000  मिलते  हैं ,
‘जनसंख्या  पर  नियंत्रण  चाहिए , गजब  की  न्याय  प्रणाली  है ।
(3)
‘दो  किलो  चावल  लेने  70000  की  मोटर  साइकिल  पर  आते  हैं  लोग ,
‘यह  बिचारे  भी  है , गरीब  भी  हैं ,  कानून  की  आंखें  बंद  हैं ।
(4)
‘चीन  में  संविधान  बहुत  छोटा  है , पर  अपराधी  बचता  नहीं ,
‘भारत  में  संविधान  विशाल  है ,’अपराधी’  पकड़ा  नहीं  जाता ‌!
(5)
‘गाड़ी  चलाते  कानून  की  खूब  अवहेलना , ले  देकर  छूट  जाते  हैं  अक्सर,
‘सरेआम  कानून  का  मजाक , बड़े  अधिकारी  अनजान, गजब  हिंदुस्तान !
(6)
‘हर  सरकारी  दफ्तर  में  आपाधापी ,  खूब  दो  नंबरी  लेन  देन  होता  है ,
‘देश  के  रखवाले  कहते  हैं, तरक्की  खूब  है- सेवादारों  की ,जनता  की  नहीं ?
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