Home कविताएं “दोस्ती, संस्कार और प्यार के बंधन ‘

“दोस्ती, संस्कार और प्यार के बंधन ‘

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[1]

‘दोस्ती  दिल  का  अहसास  है , कीमत  नहीं  आँकी  जाती  कभी ,’
‘ दोस्ती  वो  जगमा  है  जो   हर  साज  प र , गाया   नहीं   जाता ‘|

[2]

बिना  संस्कारों  के  जन्म  का  अध्याय  , कोरे  कागज  सरीखा  है ,’
‘आकस्मिक दुःख  और  व्यवधानों से  बचने हेतु संस्कार जरूरी हैं ,’
‘अहित की योजना  से बचने हेतु  सुरक्षा  व संयम  का  पथ चाहिए ,
‘क्रोध और बदले की  भावना का जन्म,अंधकार  में  डूबा देगा  तुझे’ |

[3]

‘प्यार  के  बन्धन  दफन  होते  जा  रहे  हैं  कब्रिस्तानों  में ,’
‘पिता-पुत्र  का  स्नेह  अंतिम पायदान पर  चढ़ा  लगता  है ,;
”कहीं ‘पति’ बहसी  तो  कहीं पत्नी सुपर्णखा  नज़र आती  है’ ,
”अब भाई-भाई अलग रहने लगे और पडौसी कहलाने लगे “|

[4]

‘हर  मौसम में भयंकर  बदलाव  पूरे चरमोत्कर्ष पर है’ ,
‘आशा  और  अरमानों’ की  होली  रोज़ खूब  जलती है ‘,’
मर्यादा नाम की चीज खतम,बेहियाई आसमान पर है’ ,
‘यह  कोई  साजिश  नहीं  , ‘ हकीकत ‘  की  श्रंखला  है’ |

 
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