0 second read
0
0
944

‘संसार’ में ‘ जिस-जिस का’ ‘आश्रय’ लिया जाएगा ,
‘जीवन नैया’ ‘बीच मझदार’ ‘छोड़ कर चला जाएगा’ ,
‘आपकी’ ‘अंतिम मंज़िल’ ‘परमात्मा ‘ है – ‘उसी से विमुख’ ,
‘कैसा जीवन’ ‘जी रहे हो’ ? ‘क्या कभी’ ‘सोचा नहीं’ ?

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In धार्मिक कविताएँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…