Home ज़रा सोचो ‘ज़िंदादिली को जिंदा रक्खो सब कुछ जान जाओगे ‘ !

‘ज़िंदादिली को जिंदा रक्खो सब कुछ जान जाओगे ‘ !

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[1]

‘मैं  हर  उल्झन  झेल  जाता  हूँ’ ,
‘रो-रो  कर  जीना  नहीं  आता ‘,
‘मेरी  मस्ती  अभी  जिंदा  है’ ,
‘जिंदा  दिल  इन्सान  कहते  हैं  मुझे ‘|

[2]

‘ मेघ  गरजते  बहुत  देखे ‘ , ‘ बरसते  बहुत  कम  देखे ‘,
अनेक फूलों  से  सजी धरती ,महकते  बहुत  कम  देखे ,
देखो ! ‘ भरे  है  आदमी  ही आदमी  इस  संसार  के  अंदर’ ,
हाँ  !  सही  इंसान  बन  उभरे , बहुत  कम  आदमी  देखे’ |

[3]

‘हम  अनेकों  अहसास  छिपाए  रहते  हैं’,
‘कुछ  कह  नहीं  पाते ‘,
‘वो’  हमें  नादां  समझते  हैं ‘,
‘बड़ा  अफसोस  है  इसका ‘|

[4]

‘वो  साफ़गोई  की  नुमाइंदगी  करते  हैं’,
‘दिले  नादां  ये  ही  समझता  रहा ‘,
‘पलक  झपकते  ही  झटक  कर  चले  गए’,
‘हम  हाथ  मलते  रह  गए ‘|

[5]

‘हमें  तो  सबके  दिलों  में  रहना  है’,
‘इससे  आगे  सोचते  ही  नहीं’,
‘क्या  वो  भी  ऐसा  ही  करते  हैं’,
‘इसका  कुछ  पता  नहीं ‘|

]6]

‘दिल  बड़ा  नादान  है ‘हर  किसी  को  पैगम्बर  का दर्जा  देता  रहा ‘,
‘अधिकतर  दिलजले  ही  मिलते  हैं ,’अनुमान  नहीं  हुआ  हमको’|

[7]

‘मैं ‘ ,’ रिस्ते  नहीं  बनाता ‘ ,’ हम ‘ मिल  कर  बनाते  हैं ‘,
‘चलो  , अपने  अहसासों  को  खूबसूरत  बनाएँ ,आगे  बढ़ें ‘|

[8]

‘ कान्हा ! तू  सौदाई  है ‘ ‘ हमें  सबको  रिझा  कर ‘ ‘ घायल  कर  देता  है ‘,
‘तेरी छवि”जब  भी  मन  में  उतरती  है’, ‘और  कुछ अच्छा नहीं लगता’ |

[9]

‘मंदिर  में  हम  देवता  को  मनाने  जाते  हैं’,
‘ताकि  सुखमय  जीवन  जी  सकें ‘,
‘जो  मिला  है  उसकी  कदर  नहीं’ ,
‘और  ज्यादा  की  हवस  खतम  नहीं  होती’|

[10]

‘जब  निराशा ,अनुत्साह ,कामचोरी , उदासी  ओढ़  रक्खी  है’,
‘असफलता का  उदय हो गया  समझो’ ,’रोते-रोते  बीतेगा जीवन ‘|

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