Home कविताएं प्रेरणादायक कविता ख़र्चीले जीवन से बचो सदा !

ख़र्चीले जीवन से बचो सदा !

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‘जो’ ‘ दोष बताए’, ‘गुरु तुल्य’ ‘ आदर करो’ उनका सदा ,
‘कभी’ ‘ अन्यों के दोष’ ‘ मत गिनाओ’ ,’विवाद मे न पड़ें’ ,
‘सादगी से रहना’, ‘स्वावलंबी बनना’,’जन चर्या मे जोड़ें’ ,
‘खर्चीला जीवन’-‘दूसरों का दास’ ‘बनाता है’, ‘कभी उभरने’ नहीं देता |

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