Home कविताएं प्रेरणादायक कविता ‘हीन मत बनो’ , ‘वास्तविक आनंद नहीं मिल पाएगा ‘ |

‘हीन मत बनो’ , ‘वास्तविक आनंद नहीं मिल पाएगा ‘ |

1 second read
0
0
1,139

‘मन   को   एकाग्र   रखना    कठिन   है’  ,  ‘पर  असंभव   नहीं ‘ ,

‘अस्थिरता  -‘सदा   दुःखद  स्थिति  के  अधीन   कर   देती   है’ ,

‘अनुचित  एवम  विवेकहीन  विचारों  को’  ‘मन  में  न  आने  दो’ ,

‘हीनता’-‘कभी  वास्तविक  सुख ‘का ‘आनंद  लेने  ही  नहीं  देती’  | 

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In प्रेरणादायक कविता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…