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हर घर में ‘माँ-पिता’ का अस्तित्व’ ‘आधार कार्ड ‘ है !

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पिता…पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,
पिता…पिता सृष्टि मे निर्माण की अभिव्यक्ति  है,
पिता.. अँगुली पकडे बच्चे का सहारा है,
पिता …कभी कुछ खट्टा कभी खारा है,
पिता…पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता…पिता धौंस से चलने  वाला प्रेम का प्रशासन है,
पिता…पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,


पितापिता छोटे से परिंदे का बडा आसमान है,
पितापिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,


पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं,
पिता से परिवार में प्रतिपल राग है,
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है,
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ती है,
पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिति की भक्ती है,
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ति है,


पिता…पिता रक्त निगले हुए संस्कारों की मूर्ती है,
पिता…पिता एक जीवन को जीवन का दान है,
पिता…पिता दुनिया दिखाने का एहसान है,
पिता…पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,

तो पिता से बडा तुम अपना नाम करो,
पिता का अपमान नहीं उनपर अभिमान करो,
क्योंकि माँ-बाप की कमी को कोई बाँट नहीं सकता,
और ईश्वर भी इनके आशीषों को काट नहीं सकता,
विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है,
माँ-बाप की सेवा ही सबसे बडी पूजा है,
विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्रा व्यर्थ हैं,
यदि बेटे के होते माँ-बाप असमर्थ हैं,
वो खुशनसीब हैं माँ-बाप जिनके साथ होते हैं,
क्योंकि माँ-बाप के आशीषों के हज़ारों हाथ होते हैं
क्योंकि माँ-बाप के आशीषों के हज़ारों हाथ होते हैं

माँ -बाप  के  अस्तित्व  का  अहसास  रख , जीवन  मे  कमी  न  रह  पाएगी ,

विश्व   के  सभी  तीरथों  के  दर्शन  करता  फिर , कुछ   हांसिल   नहीं   होगा  |

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