Home ज़रा सोचो हर किसी को’ ‘माँ चाहिए’,’बहन चाहिए’,’पत्नी चाहिए’,-‘बेटी क्यों नहीं

हर किसी को’ ‘माँ चाहिए’,’बहन चाहिए’,’पत्नी चाहिए’,-‘बेटी क्यों नहीं

2 second read
0
0
2,058

‘हर किसी को’ ‘माँ चाहिए’,’बहन चाहिए’,’पत्नी चाहिए’,-‘बेटी क्यों नहीं ‘ ?
‘बेटी नहीं बचाओगे’ तो ‘माँ,बहन,पत्नी ‘को ‘जहां मे’ ‘ढूंढते रह जाओगे’ ,
‘समय रहते’ ‘यदि नहीं सुधरे’ , ‘आपत्ति-जनक’ ‘व्यवहार’ ‘करते रहे’ तो ,
‘कालान्तर मे’, ‘संसार की रचना’ का ‘स्वप्न ‘-‘स्वप्न बन कर’ ‘रह जायेगा’ |

Load More Related Articles
Load More By Tara Chand Kansal
Load More In ज़रा सोचो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘कामयाबी पर गुमान’ , ‘शेर-दिल ‘ को भी ‘गुमनामी मे ‘ धकेल देगा

‘कामयाबी पर गुमान’ , ‘शेर-दिल ‘ को भी ‘गुमनामी मे ‘ धक…