Home ज़रा सोचो ‘हमारे संस्कार ही हमारा दर्पण है ‘ !

‘हमारे संस्कार ही हमारा दर्पण है ‘ !

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[1]

‘हम  सफर  के  कांधे  पर  सिर  रखते  ही  पसीना  सूख  जाता  है ‘,
‘ बुढ़ापे  में  अहसास  करोगे  , ‘  हम सफर  क्या ची ज  है ‘?

[2]

‘ज़िंदादिली  से  जीना ,’हर  किसी  के  हाथ  में  है  फिर  भी ‘,
‘ कोई  रो – रो  कर  जिये  तो  क्या  करें  उनका ‘|

[3]

‘वो, मतलब  से  याद  करते  हैं ‘,
‘हम  यारों  के  यार  हैं ‘,
‘अपनेपन  के  अहसास  से  लबालब  हैं ‘,
‘भूलते  नहीं  कभी ‘|

[4]

‘किसी  का  साधारण  वर्तमान  देख’ ,
‘नफरत  से  मत  नवाजो ‘,
‘ध्यान  रक्खें , कोयलों  की  खान  में ‘,
‘हीरा’  भी  पाया  जाता  है ‘|

[5]

‘इज्जत, ताकत, शोहरत  से  पहले’ ,
‘सांवरे  सरकार  की  जरूरत  है ‘,
‘दुनियांदारी  में  फंस  कर  मेरे  दाता’ ,
‘चकनाचूर  हो  गया  हूँ  मैं ‘|

[6]

‘हर  समस्या  की  ताकत’ ‘मन  की  शक्ति’ से  कमजोर  रहनी  चाहिए ‘,
‘कमजोर  मन  स्थिति  इन्सान  को  कभी  ‘ उभरने  ही  नहीं  देती ‘|

[7]

‘अच्छा  मित्र ‘ और ‘अच्छा  रिस्ता’,
‘न  खरीद  सकते  हो  न  बेच  सकते  हो ‘,
‘दोनों  इंसानियत  की  धरोहर  हैं ‘,
‘सही  जीने  का  संगम  है  यारों ‘|

[8]

‘न  रूठो  किसी  से’,
‘न  वायदा  झूठा  करो’,
‘जब  असमंजस  में  हों  तो  बस’, 
‘खुद  से  मिला  करो ‘|

[9]

‘हर लम्हा  खूबसूरत  होना  चाहिए’ ,
‘उम्र  तो  बढ़ती  ही  है  बढ़ती  रहे’ |

[10]

‘कुछ  गल्ति  हो  जाए ‘,
‘तुरंत  स्वीकार  लेनी  चाहिए ‘,
‘लंबा  सफर  करने  से ,
‘पुनः  गल्ति  की  संभावना  रहती  ही  है ‘

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