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‘ हमारे देश में |

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हमारे  देश  में —
‘घोटाला’  भी  हमारे  देश  में  ‘ सोने  की  चिड़िया ‘  हो  गया  है,
‘ अक्सर  लोग  इसे  करने  को ,  बेचैन  पाए  जाते  हैं  यहां ,
‘घोटालों  के  नए-नए  करिश्मे, अखबार  की  शोभा  बढ़ाते  हैं,
‘सिवा  हमारे देश  के ‘घोटालों’ का  इतना  जखीरा,कहीं  नहीं  मिलता ‘ !
[2]
हमारे  देश  में  —
‘पहले  आजादी  के  आंदोलन  में ,’ कर्तव्य  भावना’ ऊंचाई  पर  थी ,
‘आजादी  के  बाद  भयंकर  गिरावट  आती  चली  गई, लोग  बदल  गए,
‘आज  की  पीढ़ी  को  – संविधान  की  आत्मा  से  जोड़ने  की  जरूरत  है,
‘ अधिकार’ और  ‘कर्तव्य ‘  में  तालमेल  बैठाना, आज  की  चुनौती  है , |
[3]
‘ हमारे  देश  में’
‘देश  में  100  करोड़  मोबाइल  है , कार्य  करने  की  आधुनिक  तकनीक  है ,
‘नोटबंदी  जैसे  कदम ,  राजनीति  से  ऊपर ,  देश  हित  में  फैसला  था,
‘सर्वेक्षणों  से  स्पष्ट  है ‘भ्रष्टाचार  में’, ‘भारत’ अग्रिम  पंक्ति  में  शुमार  होता  है,
‘उज्जवल  भविष्य  हेतु ‘सरकार  का  साथ दो’,सबके  सहयोग  की  जरूरत  है’
[4]
‘हमारे देश में
‘समाज’  सुधार  चाहता  है ,  और  मैं ‘ देश  में  आमूल -चूल  परिवर्तन ,
‘बिना न्यायाधीशों  की  कार्यप्रणाली, और ‘कानून  सुधारें ,कुछ  नहीं  होगा,
‘अधिकांश  देशवासी , ‘ बेईमानी  के  दलदल ‘में  बुरी  तरह  फंसे  लगते  हैं,
‘माननीय  संसद ‘  यदि  चाहे  तो , हमारे  देश  का  नक्शा  ही  बदल  जाए’ !
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