Home कविताएं देशभक्ति कविता “हमारे देश में “- “राजनीति के फंदे अजीब हैं ” !

“हमारे देश में “- “राजनीति के फंदे अजीब हैं ” !

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“हमारे देश में ” :-
“नई पीढ़ी को ‘घोटाला-प्रथा’ “विरासत में मिलती दिखाई देती है” ,
“नित नए घोटालों की कथा” ,” थाली में परोस कर पेश होती है” ,
“कमाल यह है” ,’ सरकार देख कर भी” ,” मौनी बाबा बनी बैठी है” ,
“जब हर साख पर उल्लू बैठा हो”, “अंजामे गुलिस्ता क्या होगा “?

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“हमारे देश में “:-

“भड़काऊ भाषण’ -‘समाज को तोड़ने’,’ बद-अमनी’ ‘फैलाने का काम करते हैं” ,
“देश-द्रोह के मुकदमे उन पर दर्ज़ क्यों नहीं होते”, “सरकार खामोश क्यों “?
“वो लोग” ,” न बंदूक” , “न लाठी” ,” न डंडे चलाते हैं” “और न तेज़ाब फेंकते हैं” ,
“फिर भी’ ” आम आदमी बेचैन है” ,” डरा रहता है” , “नींद हराम है सबकी” |

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 “हमारा देश” :-

“देश इस समय बाहरी और आंतरिक खतरों से जूझ रहा है” ,
“सौभाग्य से मजबूत सरकार है”,”मुंहतोड़ जबाब देना जानती है” ,
“देखना है की ‘मुस्लिम महिलाओं का भविष्य” “भारत में कैसा है” ?
“लड़ाई प्रकाश और अंधकार के बीच है”,”खुदा खैर करे सब ठीक हो” |

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