Home राजनीति ” हमारे देश में क्या हो रहा है ?- समझिए “

” हमारे देश में क्या हो रहा है ?- समझिए “

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[1]

हमारे  देश  में
‘डीएसपी  देवेंद्र  सिंह  की  कुशाग्र  बुद्धि  देख, ‘तमगे  से  नवाजे  गए,
‘अपने   ही   टेंट   में   पेबंद   साबित   हुए ,  ‘ गुरु  घंटाल  ही  निकले’ !

[2]

‘तत्काल  पाने  की  लालसा  , लोन  का  प्रचलन ,
‘उधार  की  जिंदगी  को ,  बढ़ावा  रोज  मिलता  है,
‘हताश , निराश  और  तनावग्रस्त  जीवन  का  अवसाद,
‘परिवार  का  सहयोग  व  राहत , उपलब्ध  नहीं  होती’,
‘नशा, बुरी  संगत  और  लापरवाही , चरम  सीमा  पर,
‘पलायन , हत्या , आत्महत्या , रोज  की  समस्या  है,
‘नकारात्मकता ,निंदक, हिंसक ,आक्रामक  बनाती  है,
‘इसलिए  परिणाम – परिवार  का  विनाश  नहीं  तो  क्या  है,
‘बेहतर  है  धीमी  गति  से  परिश्रम  व  ऊपर  उठने  का  प्रयास,
‘धैर्य, दया, शांति , संतोष, सहनशीलता  के  भाव  जागृत  करो,
‘स्पर्धा  से  जीतना  और  विपरीत  हार  का  स्वाद  चखते  रहो ,
‘दुख, परेशानी, झेलने  की  ताकत, विकास  पर  ले  जाएगी,
‘सही  राह अपनाना, मौन की  परिभाषा सीखना,बैर-वैमनस्य घट आएगा,
‘स्नेह  और  अपनापन  फले – फूलेगा , हम  सभी  जी  जाएंगे’ !

[3]

‘खिलाफत  कर  रहे  नेताओं  को  पड़ोसी  देशों  की  सैर  कराने  की  जरूरत  है,
‘जड़  खोदने  का  नशा  उतर  जाएगा, समझ लेगा  अपना  देश  ही  सुरक्षित है,
‘ नाव  में  बैठा  डोगी  भौंकता  ही  रहा , ‘ नदी  में  फेंकते  ही  वो  समझ  गया,
‘ नाव  में  ही  सुरक्षित  था  , हे  प्रभु  ! ‘  जल्दी  किनारे  पर  लगा  दे  नाव  को,                                                                                              

[4]

आर्टिकल  370  का  विरोध, आजाद  कश्मीर  का  नारा, नोटबंदी  का  विरोध,
तीन  तलाक  का  विरोध, जीएसटी  का  विरोध, सीएए  और  एनआरसी  का  विरोध,
यह  ज्ञान  का  विरोध  है , ‘ उन्नति  की  रुकावट  है , ‘ बेहूदगी  की  पराकाष्ठा  है,
‘ देश  के  पैर  जमने  दो ,’ उखाड़ो  मत , ‘ चूके  हुए  कार्यों  को  पूरा  होने  दो , !

[5]

‘जहां  नेता  घुसे , बुराई  पहले  घुसी , बनते  काम  बिगड़ने  लगे,
‘जो  करना  है, करते  नहीं, जो  नहीं  करना, वहीं  पर  टांग  मिलती  है, !

[6]

‘राजनेताओं  का  मकसद ,’सांप्रदायिकता  और  भ्रष्टाचार  का  अंत  करना  था,
‘सभी  भटक  गए , ब‌िदक  गए , देश  को  लूटने  के  ‘ षड्यंत्र ‘ रोज  खुलते  हैं !

 

 

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