Home ज़रा सोचो ‘हमारे देश में कुछ ऐसा घट रहा है ‘|’ ध्यान देने की जरूरत है ‘ |

‘हमारे देश में कुछ ऐसा घट रहा है ‘|’ ध्यान देने की जरूरत है ‘ |

6 second read
0
0
915

[1]

‘भूतकाल  को  भूलें , भविष्य  की  चिंता  बिना ,  वर्तमान  को  भोगें ‘,
‘शांत-प्रशांत  रह  कर  जीवन  यापन  ही ,’जीवन  की  सर्वश्रेष्ठ  कला  है ‘|

[2]

‘हर  छेत्र  का  प्राणी  आपाधापी  की  दलदल  में  धंसा  सा  लगता  है’,
‘देश-भक्ति और ‘कर्म-शक्ति’रसातल में है’,’पूरी मसक्कत की जरूरत है’|

[3]

‘जो  देश  के  लिए  समर्पित  नहीं ‘,
‘गद्दारों  की  श्रेणी  में  रक्खो  उन्हें’, 
‘हंटर  भयंकर  पड़ने  चाहिए’, 
‘मुआफी  की  दरख्वास्त  भी  निरस्त  हो’|

[4]

‘कोई  ऐसा  छेत्र  नहीं  मिलता  जो, 
‘घूसख़ोरी  की  गिरफ्त  में  न  हो ‘,
‘हर  विभाग  में  चौगुना  मांगने  लगे’ ,
‘क्या  गजब  प्रशासन  है ‘|

[5]

 ‘घटिया  राजनैतिक  सोच  ने  देश  के  हर  प्राणी  को  बेईमान  बना  डाला ‘,
‘एक  जाँबाज  ने  बीड़ा  उठाया  है ‘, ‘ देश  की  गंदगी  साफ  करने  का ‘|

[6]

‘हमारी  जड़ों  में  बेईमानी  भरी  है’ ,
‘पिछले  इतिहास  ने  हमें  ये  सिखाया  है ‘,
‘हर  कानून  में  छेद  है’,’समयानुसार 
कानून  बदलने  ही  जरूरत  है’|

[7]

‘जब  मन  में  पावनता ,नम्रता  और  स्नेह  घर  बना  लेते  हैं ‘,
‘फिर  उस  घर  का  वातावरण’ ,’स्वर्गमयी  हो  गया  समझो ‘|

[8]

‘जब  इंसान  शोहरत ,हुकूमत  हासिल  करने  को  सफल  जीवन  मान  लेता  है ‘,
‘आत्मा  का  कल्याण ,’ मोक्ष ‘,’ मुक्ति  की  भावना ‘ गौण  ही  रह  जाती  है ‘|

[9]

‘न  किसी  पर  जुल्म  ढ़ाओ’ ,
‘न  किसी  का  तिरस्कार  करो ‘,
‘उठते- बैठते , सोते- जागते ‘,
‘तमाम  फर्जों  की  अदायगी  करते  रहो ‘|

[10]

‘तन-मन-धन  का  समर्पण  भाव’ ,
‘महा-मानव  बना  देगा  तुझे ‘,
‘मन  में ‘अहम- भाव’ और  ‘कर्ता -भाव’
‘पैदा  होना  ‘कलंक’  ही  मानो ‘|
 
  [11]
‘लक्ष्य  सुनिश्चित  कर  आगे  बढ़े’ ,
‘तो  रास्ता  मिलना  सुनिश्चित  है ‘,
‘जो  बिना  विचारे  आगे  बढ़ा’ ,
‘मुंह  की  खाई  है  उसने ‘|
Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In ज़रा सोचो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…