Home ज़रा सोचो ” हमारे देश ” की कुछ विरोधवास घटनाएँ ” कुछ सही होने की अपेक्षा है हमें “

” हमारे देश ” की कुछ विरोधवास घटनाएँ ” कुछ सही होने की अपेक्षा है हमें “

0 second read
0
0
817

[1]

हमारे  देश  में
‘काला  धन  न  बनाना, आपस  में  फूट  न  डालना, विवेचना  करना,
‘सरकार  के ‘सही  फैसले’ पर  सहयोग  देना, ‘देशभक्ति’  की  श्रेणी  है,
‘समूचा  विपक्ष’ ‘अविश्वास’ और  ‘फूट  का  प्रतिबिंब’ नजर  आता  है,
‘महत्वाकांक्षाओं’ को  कम  करो,सरकार  को  सहयोग  दो ,यही अपेक्षित  है’|
[2]
हमारे   देश   में
बात  सही  हो  या  गलत ,’ विपक्ष ‘  का  हर  बात  का  ‘विरोध’  राजनीति  नहीं,
‘ देशहित ‘ पीछे  धकेल  दिया  सबने , ‘ अच्छी  तरक्की ‘  कर  रहे  हैं  हम’ !
[3]
हमारे  ‘देश   में
‘आज  ‘बेटी  बचाओ  बेटी  पढ़ाओ’  योजना , ‘ जन- धन  योजना,
‘मेक  इन  इंडिया,  स्टार्ट  अप  इंडिया ,  उज्जवला  योजना,
‘रोजगार , सड़क ,बिजली ,पानी  योजना , गैस ,फसल योजना,
‘बीमा  योजना, सबका  विकास  भावना, लोग  समझने  लगे  हैं,
‘इसमें  शक  नहीं  कि  ‘देश  अब  बदल  रहा  है’, आगे  बढ़  रहा  है,
‘देश  में ‘ बड़े  बदलाव’  आ  रहे  हैं, बदलावो  को  स्वीकारो ,आगे  बढ़ो’ !
[4]
 

 हमारे   देश   में

‘जल  है  तो  कल  है’, फिर  भी  लोग  ‘पानी  की  बर्बादी’ से  बाज  नहीं  आते,
‘मुफ्त  का  चंदन’  समझ कर  लोग, ‘पानी  की  बचत’  को ‘भूल’  जाते  हैं,
‘झीले  और  नदियां’ ‘ प्रदूषण  का  शिकार’  होकर  ‘सूखती  जा  रही  है,
‘नहीं  सुधरे  तो, ‘दूध  की  गंगा  का  देश’ ‘कंकालों  का  देश’ बन  जाएगा’ !
 [5]
हमारे   देश   में
‘जल , जंगल , जमीन , के  स्रोत  पकड़ो  , ताकि  ‘प्रदूषण’  से  बचे  रहो,
‘प्रकृति  की  रक्षा, ‘गंगा  जमुना’ की  पवित्रता  हेतु, सदा  जागरूक  रहो,
‘पर्यावरण’  बचाने  के  अनेकों  ‘मानदंड’  है , उनका  प्रयोग  करते  रहो ,
‘ऊर्जावान  बन  कर  लक्ष्य  हासिल  करो , देश  ‘विकसित’  हो  जाएगा,
‘देश  का  नागरिक’  सोया  लगता  है , सरकार  को  सहयोग  नहीं  देते ,
‘ संयुक्त  प्रयास ‘ एकमात्र ‘  मंत्र ‘ है ,’ कुंभकरण  की  नींद ‘  से जागो ‘ !
[6]
हमारे    देश   में
‘जो  देश  के  लिए  मरे ,’ मर  कर  भी  जी  जाते  हैं  यारों ,
‘जो  हत्यारे  हैं ,अत्याचारी  हैं, ‘जीते  जी  मरे  हुए  समझो’ !
‘कुछ  ऐसे  कर्म  करो , मर  कर  भी  सभी  को  याद  आते  रहो,
‘हर  घर  में ‘प्यार  की  ज्योति’ जले, ‘नफरत’ का  नामो  निशा  ना  हो’
 
Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In ज़रा सोचो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…