Home ज़रा सोचो ” हमारे जीवन को छूते कुछ पहलू – सिर्फ समझने की जरूरत है ” |

” हमारे जीवन को छूते कुछ पहलू – सिर्फ समझने की जरूरत है ” |

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[1]

‘ जब  तक  हम  काम , क्रोध , लोभ , मोह , अहंकार ,  मन  में  संजोए  रखेंगे,
‘कड़वी  वाणी, असहनशीलता, दुर्व्यवहार, विपरीत  भावनाओं,  से  घिरे  रहेंगे’ |

[2]

‘ प्रभु  का  सिमरन’ ‘सुदृढ़  आश्रय” और ‘ठोस  आधार’ प्रदान  करता  है,
‘आनंदमय जीवन’ का  भवन  निर्मित होता  है,’कोई ‘दिशाहीन’ नहीं  होता’ !

[3]

‘हम  किसी  स्थिति  का  क्या ‘अर्थ’ निकालते  हैं,’मन  स्थिति’ तय  करती  है,
‘अर्थ’  ही  सारे ‘अनर्थो ‘ की  जड़  है, ‘ज्ञान  का  दीपक’ जलाने  की  जरूरत  है’ !

[4]

‘नवजात  शिशु’ को ‘नाजायज  या  अनाथ’ कहना ,’मनुष्यता’  का  अपमान  है,
‘रिश्ते’  नाजायज   हो  सकते   हैं,  ‘परंतु   संतान   का  क्या  कसूर   है  इसमें ‘ ?

[5]

‘ज्ञान  की  लौ’ ‘मन  और  आत्मा’ दोनों  को ‘रोशन’ किए  रखती  है,
‘ऐसा  प्राणी ‘मार्गदर्शक’  व  ‘प्रेरणा  का  स्रोत’  बन कर  उभरता  है’ !

[6]

‘धन  की  बहूलता’ अक्सर  इंसान  की ‘चाल’ बदल  देती  है,
‘ धर्मांधता ‘  भी  कई  बार  अनुचित  काम  कराती  है ,
‘धन ‘ में ‘अकड़’ तो ‘धर्म’  में ‘विनम्रता’ रंग  भर्ती  है,
‘इसीलिए कहते  हैं ‘अधिकता’ हर चीज  की ‘बुरी’ होती  है’ !
[7]
‘पूरी  तरह  जानता  हूं,
‘दर्द  का  दंश’ बड़ी  तकलीफ  देता  है,
‘इसीलिए  मेरा  ‘प्रयास’  है,
‘किसी  के  ‘दर्द  की  वजह’  मैं  ना  बनू ‘ |
[8]
‘चाकू’ स्वयं में  अच्छा  है  या  बुरा, यह  उसके ‘कर्म’ तय  करते  हैं,
‘ गर्दन’ काटेगा  तो  बुरा, ‘पेट  काटकर’ ऑपरेशन  किया, तो अच्छा,
‘जुबान  से  ‘ गाली ‘  निकलेगी  तो’, ‘ विध्वंसकारी ‘  कहेंगे  सब,
‘राम  नाम’  के  स्नेह  भरे  स्वर  निकले , तो  ‘कल्याणकारी’  है’ |
 
[9]
‘यदि  ‘बच्चा’  किसी  ‘कुशल  कलाकार’  के  हाथों  में  गया,
‘वह  निश्चित  उसे ‘देवधारी  प्राणी’ बनाकर  ही  दम  लेगा,
‘अगर  उसको  किसी ‘चांडाल  की  छाया’ से  नवाजा  गया
‘विध्वंसकारी’ निकलेगा , ‘कल्याणकारी’ बन  नहीं  सकता |
[10]
‘किसी  ‘ ज्ञान ‘  की  जानकारी  होना , ‘ पूर्णता ‘ की  निशानी  नहीं  है,
‘ उसमें ‘कर्म  का  आचरण’ और ‘समाज  का  कल्याण”दोनों समाए  हैं’ !
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