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हमारी विरसात

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*अकेले हम बूँद हैं,*
*मिल जाएं तो सागर हैं।*
*अकेले हम धागा हैं,*
*मिल जाएं तो चादर हैं।*
*अकेले हम कागज हैं,*
*मिल जाए तो किताब हैं।*


*अकेले हम अलफ़ाज़ हैं,*
*मिल जाए तो जवाब हैं।*


*अकेले हम पत्थर हैं,*
*मिल जाएं तो इमारत हैं।*


*अकेले हम दुआ हैं,*
*मिल जाएं तो इबादत हैं।*

*संस्कारों से बड़ी कोई*
*वसीयत नहीं….*
*और*
*ईमानदारी से बड़ी कोई*
*विरासत नहीं…!*

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