Home कविताएं ‘हमारी बगिया के कुछ फूल ‘

‘हमारी बगिया के कुछ फूल ‘

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[1]

‘जीवन  को  ‘गुलाब’  की  भांति  समझ’ ,
‘स्नेह’  को  उसका  शहद ‘,
‘शहद’  को  भँवरे  की  तरह  से  चख’ ,
‘आनंद  में  गोते  लगा ‘|

[2]

‘प्यार’ पाना  और  उसे  बनाए  रखना ‘, 
‘बेहद  कठिन  है’,
‘उसे  भूल  जाना  और  भी  कठिन ‘,
‘खुदा  संभालना  हमको ‘|

[3]

‘जैसे ‘जल’  जिस  पढ़ार्थ  में  मिलाते  हैं ,
‘वैसा  ही  बन  जाता  है ‘,
‘समझदार’  प्राणी  परिस्थिति  अनुसार ,
‘खुद’  को  ढाल  लेते  हैं ‘|

[4]

‘कौन  कहता  है ‘आतंकवादी  का  कोई  धर्म  नहीं  होता ‘,
‘अमरनाथ-यात्रा’ पर हमला और ‘हज-यात्रा ‘ पर क्यों नहीं ;|

[5]

‘जब  भी  किसी  बुजुर्ग  ने’ ,
‘किसी  के  सिर  पर  हाथ  फेरा  है ‘,
‘आशीर्वाद’  और  ‘वरदान’  दोनों ,
‘उसकी  झोली  में  जा  गिरे ‘|

[6]

अंधविश्वास  को  तुम  किसी  भी   तरह  से  गले  मत  लगाओं,
बच्चों को  ईश्वर का उपहार  बता कर, जनसंख्या  मत  बढ़ाओ.|

[7]

‘दुनियांदारी  के  सब  सामान  खूब  दौलत  खर्च  करके  मिलते  हैं ‘,
‘हथियाने  में  लगा  पड़ा  है ,’परिणाम  से  अनजान  है  अब तक ‘|

[8]

‘हवा ,पानी ,प्रकाश ,नींद ,आनंद  और  साँसे  बेसकीमती  हैं ‘,
;सब कुछ  निःशुल्क मिलते  हैं ,’फिर भी  कदर नहीं इनकी ‘|

[9]

‘शान ,अटारी ‘ सभी  आडंबर  हैं’ ,
‘आसानी  से  सोने  नहीं  देते ‘,
‘आवश्यकता  अनुसार  संग्रहण’ ,
‘शीतल  नींद  का  प्रारूप  है ‘|

[10]

‘जैसे  फल  और  फूल  स्वम  स्फुरित  होते  हैं  व्रक्षों  पर ‘,
‘तू, अच्छा -बुरा कोई भी कर्म कर ,’परिणाम जरूर भुगतेगा ‘|

 

 

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