Home कविता ‘हमारी जिंदगी की सुंदर सोच से फूल खिलते ही हैं ‘

‘हमारी जिंदगी की सुंदर सोच से फूल खिलते ही हैं ‘

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[1]

‘लालसा  हेतु  सबसे  लड़  पड़ता  है’,’आडंबरों  में  फंसा  रहता  है ‘,
‘अज्ञानता  से  भरा  मानव  सही  धर्म  का  सार  जानता  ही  नहीं ‘|

[2]

‘प्रेमपूर्ण  व्यवहार,निर्मल  भावना  और, 
‘नेकी  पवित्रता  के  सबूत  हैं ‘,
‘भेदभाव  की  दीवारें  खड़ी  करना’ ,
‘धर्म  की  श्रेणी  में  नहीं  आता ‘|

[3]

‘हम  लालची  और  आलसी  दोनों  हैं’ ,
‘इसीलिए  उभरते  ही  नहीं’,
‘इंसानियत  को  जंग  लगा  है’ ,
‘बिना  हाथ  हिलाये  सब  कुछ  चाहिए’|

[4]

प्रभु कहते है —

‘मुझ  पर  भरोसा  किया  तो  तुझे  टूटने  नहीं  दूंगा’,
‘अविश्वास से  जगमग रहा तो  टूटना सुनिश्चित  समझ ‘|

[5]

‘हम  एक – दूसरे  को  महत्व  देते  रहे  तो  कोई  नहीं  टूटेगा ‘,
‘आपस में  टांग खींचते रहे  तो  दोनों एक दिन  मिट जाएंगे ,’|

[6]

‘कठिनाई   तो   आई   मगर   मैं   मजबूत   हो   कर   ही   उभरा ‘,
‘मैं जानता  हूँ  अगर  ढीला  पड़ा  तो  मिट्टी में  मिल  जाऊंगा ‘|

]7]

‘जो  कहो  स्पष्ट  कहो , सत्य  कहो,
‘चाहे  कोई  खुश  हो  या  नाराज़’,
‘सुंदर  झूठ  से  प्रसन्न  करना  उचित  नहीं ,
‘रूठे  को  मनाने  की  कला  भी  सीख  लो’|

[8]

‘उदास  मत  रहना,  मैं  अपनी  खुशी  कुर्बान  कर  दूंगा  तुझ  पर’,
‘जब ‘गम’ कांटा  बन  सताये  तो ‘मेरी खुशी का  खजाना हाजिर  है आपकी खातिर’|

[9]

‘मुहब्बत  किसी  की  जागीर  नहीं’ ,
‘कब  किससे  हो  जाए  कह  नहीं  सकते’,
‘इश्क  के  दरवाजे  पर  ताला  नहीं  होता’,
‘दिल  में  उतरने  में  माहिर  है’|

[10]

‘अगर  कोई  नाराज़  है  तो  उसके  बहाव  में  बह  मत  जाना ‘,
‘भावनाओं  में  दुर्भाव का  कारण,’उसकी  व्यक्तिगत  उलझनें  होंगी ‘|

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