‘ हमारा देश “

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हमारा देश :-
‘ तिरंगा सिर्फ ‘ रेशम का  टुकड़ा नहीं,’ जिसके लिए हम लड़ते-मरते  हैं’ ,
‘यह देश की पहचान  है’ ,’ हमारा सम्मान  है’,’हमारे गौरव की गाथा  है’ ,
‘यह वो ‘तिरंगा’ है जिसके लिए सैनिक’,’अपनी जान की बाज़ी लगते है’ ,
‘तिरंगे’ की ‘शान-बान’, ‘राष्ट्र -गान पर’ ‘सारा देश नत -मस्तक है सदा ‘ |

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हमारा देश :-
‘ राजद्रोह ‘ और ‘ देशद्रोह ‘ में ‘ जमीन – आसमान का अंतर  है  भाई ‘ ,
‘सरकार का विरोध”राजद्रोह ‘ तो ‘देश-विखंडन’ की बात ‘देश-द्रोह है’ |

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“हमारा देश “:-
‘हमारी एकता’ , ‘अखंडता’ को ‘ तोड़ने  का  प्रयास’ कर  रहे  हैं  कुछ  लोग’ ,
‘इस नाज़ुक दौड़ में’ ‘ सिर्फ नफरत और निराशा से’ ‘क्या मिलेगा देश को’ ?
‘राजनैतिक प्रतिद्वेंदी’ ‘ सिर्फ कीचड़ उछालते  हैं ”बस  और  कुछ  भी  नहीं’ ,
‘काली कमाई का कटोरा’ ‘ निडर  हो  अब ‘,’ घर-घर  की  शोभा  बढाता  है ” |

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“”हमारा देश”” :-
“कड़ी मेहनत’,’लगन से’ ‘ जनता के दिलों में’ ‘रोल- माडल बन कर उभर’ ,
‘लोगों का दर्द’ ‘ बाँट’,’अपनी संवाद-शैली सुधार ‘ ,’ सब के दिलों में उतर ‘,
‘आपसी  बढ़ती खाई  को  पाटने  में  लग ‘, ‘ सब  के  जख्म  सीना  सीख ‘ ,
‘प्रांत’ ,’ भाषा’, ‘जाति’ ‘जैसे जलते सवालों को ‘, ‘प्यार  की आग  में तपा ‘ |

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“आज राजनीतिज्ञ-अहं केन्द्रित’ ‘ मतलब परस्त’ ‘,दिशा-विहीन , अविश्वसनीय ‘,
‘किसी  को  कुछ  नहीं  समझते’ , ‘एक-दूसरे  की  लाश  पर  रोटी  सेंकते  हैं सभी ;,
‘ कानूनी  व्यवस्था’ ‘अस्त- व्यस्त ‘ , ‘ जनता  घुट- घुट  कर  मरने  को  मजबूर  ‘,
‘ऐ प्रभु ‘ !’ तू  सब  कुछ  देखता  है’ ‘ फिर भी खामोश’,’ हमें – बख्श दे  दरिंदों  से ‘|

 

 

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