Home कविताएं धार्मिक कविताएँ ‘हनुमान’ -‘सफलतम’ ‘वक़्त के पाबंद’ थे , ‘चतुर थे’ ,’तुरंत फैसले’ करते थे

‘हनुमान’ -‘सफलतम’ ‘वक़्त के पाबंद’ थे , ‘चतुर थे’ ,’तुरंत फैसले’ करते थे

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‘हनुमान’ -‘सफलतम’ ‘वक़्त के पाबंद’ थे , ‘चतुर थे’ ,’तुरंत फैसले’ करते थे ,
‘हालत से’ ‘निबटने के माहिर’ थे ,’मालिक का हित’ ‘साधने मे निपुण’ थे ,
‘तुम’ -‘दस मुखौटे”लगाए घूमते’ हो,’आदर्शो का ढोंग’ ‘पीटते’ हो राममय’ जताते हो ,
‘संभल जाओ’- कभी ‘राम-हनुमान’ को ‘अपने जीवन’ मे ‘उतार कर’ तो देखो |

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