Home ज़रा सोचो ‘स्पस्ट सोच’, ‘हिम्मत’,और ‘दूरदर्शिता’ सही मित्र हैं ‘, ‘इन्हें बनाए रखना ‘ |

‘स्पस्ट सोच’, ‘हिम्मत’,और ‘दूरदर्शिता’ सही मित्र हैं ‘, ‘इन्हें बनाए रखना ‘ |

3 second read
0
0
667

[1]

‘वार्तालाप’  करते  रहो, ‘ बिल्कुल ‘ चुप  रहना ‘ भी  हितकर  नहीं,
‘बिना  बोले’ मस्तिष्क  नहीं  खुलता, ‘ काम ‘ अधूरे ‘ रहते   हैं’ !

[2]

‘कठिन  राहों ‘ से  गुजरोगे  तो, ‘मंजिल’  मिल  भी  जाएगी,
‘कामचोरी’ काम  नहीं  आती, ‘हिम्मत’ की  हवा  निकलती  है’ !

[3] 

‘सही  कार्य’ करके ‘ अच्छे  की  उम्मीद’  रखना  ‘बेमानी’ नहीं,
‘बार-बार  ‘हार’  कर  भी  एक  दिन,’ झोली ‘ भर  ही  जाएगी’ !

[4]

‘कुछ  करके  ‘किसी  के  दिल’ में  जगह  बना  ली,
‘सद्गुणी ‘  कहलाओगे,
‘सारे  यदि  ‘तुम्हारे  कार्यों’  से  ‘व्यथित’  रहे ,
‘ वह  ‘जीवन’  किस  काम  का ‘ ?

[5]

‘ सुखों  की  वसीयत’  भी  तुम  हो ,’ दुखों  के  दस्तावेज ‘  भी  तुम  हो,
‘ कैसा  ‘ दुशाला ‘  ओढ़  रखा  है ?  ‘ इस  बात  का  पता  ‘ तुझको ‘ ही  है’ !

[6]

‘ चित्र ‘ तो  सुंदर  हो  परंतु , ‘ चरित्र  पर  उंगली ‘  उठाई  जाती  हो,
‘ओढें , बिछायें  क्या  करें  उसका  ?’ तिरष्कार ‘  का  पात्र  है  वह  तो’ !

[7]

‘खुशी’-अच्छी  नौकरी, खूब दौलत  या ‘धनाढ्य रिश्तो’  में  नहीं  मिलती,
‘खुशी’- तुम्हारे  अंदर  का  ‘ हुनर ‘  है, ‘इसे  ‘मिटने’  मत  देना  कभी’ !

[8]

जरा सोचो
”सुखी’ रहने हेतु ‘सहन -शक्ति और समझ- शक्ति’ दोनों  की  जरूरत  है,
‘ एक  भी  घटा ‘  तो  समझो  ‘ जीवन  यात्रा ‘ अधूरी  रह  गई  तेरी ‘ !

[9]

जरा सोचो
‘ कुछ  लोग ‘ लोगों  की ‘अच्छाई  का  फायदा ‘ उठाने  से  नहीं  चूकते,
‘उनका  यह ‘एहसास’ जागते  ही, अगर ”बदल’ जाए  तो ‘आश्चर्य’ नहीं’ !

]10]

जरा सोचो
‘स्वार्थी  प्राणी’  को  ‘सज्जनता’  की  पहचान  होती  ही  नहीं,
‘कितनी  भी ‘सहायता’ कर  दो,’बुराई’ करने  से  नहीं  चूकते’ !

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In ज़रा सोचो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…