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‘सुविचारें ‘

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[1]

‘समय ने ‘विश्वास-अविश्वास’ की ‘भट्टी में झोंक डाला है सबको ‘,
‘ गजब  तो  यह  है  ‘ बेभरोसे  का  जमाना  आ  गया   है   अब ‘|

[2]

‘अगर  तू  अंदर  से  टूटा  है  तो  इसमें  भी  , कोई  रहस्य  ही  होगा ,’
‘हो  सकता है  प्रभु  कोई और  बड़ा  काम  ,करना  चाहते  हों  तुमसे ‘|

[3]

‘बताया  दाँव – उल्टा  पड़  गया’ ,’लेने  के  देने  पड़  गए ‘,
‘बिना  मांगे  सलाह  देना  कभी’ ,’समझदारी  नहीं  होती ‘

[4]

‘आजकल-सचरित्र  निर्धन  का  नहीं’ ,’ दुश्चरित्र  धनी  का  सम्मान  होता  है ,’
‘चरित्र  बेचा जा रहा  है  रातदिन’,’अधर्म  महामंडिट  हो  कुलाचे  मार रहा  है ‘|

 

 

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