Home कोट्स Motivational Quotes ‘सुख या दुख’- कुछ नहीं होता , यह ‘हमारी सोच ‘ का प्रभाव है |’ जैसा सोचेंगे’- ‘वैसा ही मिल जाएगा’ |

‘सुख या दुख’- कुछ नहीं होता , यह ‘हमारी सोच ‘ का प्रभाव है |’ जैसा सोचेंगे’- ‘वैसा ही मिल जाएगा’ |

1 second read
0
0
685
( सुख- दुख – एक   मन   की   स्थिति_ है   केवल )
एक बार  सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का एकादशी का व्रत था
तो पंडित जी नहीं जा सके पर पंडित जी ने अपने दो शिष्यों को सेठ के यहाँ भोजन के
लिए भेज दिया.
पर जब दोनों शिष्य वापस लौटे तो उनमें एक शिष्य दुखी और दूसरा प्रसन्न था !
पंडित जी को देख कर आश्चर्य हुआ और पूछा बेटा क्यों दुखी हो ?
क्या सेठ ने भोजन मे अंतर कर दिया ?
“नहीं गुरु जी”)क्या सेठ ने आसन मे अंतर कर दिया ?
“नहीं गुरु जी”)क्या सेठ ने दक्षिणा मे अंतर कर दिया ?
“नहीं गुरु जी ,बराबर दक्षिणा दी 2 रुपये मुझे और 2 रुपये दूसरे को”
अब तो गुरु जी को और भी आश्चर्य हुआ और पूछा फिर क्या कारण है ?
जो तुम दुखी हो ?
तब दुखी चेला बोला- गुरु जी मैं तो सोचता था सेठ बहुत बड़ा आदमी है
कम से कम 10 रुपये दक्षिणा देगा पर उसने 2 रुपये दिये इसलिए मे दुखी हूं !!
अब दूसरे से पूछा तुम क्यों प्रसन्न हो ?
तो दूसरा बोला गुरु जी मैं जानता था सेठ बहुत कंजूस है !आठ आने से ज्यादा
दक्षिणा नहीं देगा पर उसने 2 रुपए दे दिये तो मे प्रसन्न हूँ …!
बस यही हमारे मन का हाल है ! संसार में घटनाए समान रूप से घटती हैं पर कोई
उन्हीं घटनाओ से सुख प्राप्त करता है, कोई दुखी होता है ,पर असल में न दुख है न
सुख ! ये हमारे मन की स्थिति पर निर्भर है !
*इसलिए मन – प्रभु चरणों में लगाओ ,क्योकि – कामना पूरी न हो तो दुख और
कामना पूरी हो जाये तो सुख पर यदि कोई कामना ही न हो तो आनंद …*
Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In Motivational Quotes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…