Home कविताएं प्रेरणादायक कविता “सारी दुनियाँ मिट्ठी में रखने की क़ुव्वत छोड़ दे “|

“सारी दुनियाँ मिट्ठी में रखने की क़ुव्वत छोड़ दे “|

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“सारी   दुनियाँ   को   मुट्ठी   में   रखने   की   कुव्वत   छोड़  दे  जालिम”   ,

“जो  कुछ  तुझे   मिला   है “, “करोड़ों  तरसते   हैं   उसके   लिए   अब   भी “,

“तेरा  सब्र  सीमा  लांघ  आया  है”  ,” बेसब्री  की  तो  कोई  सीमा  नहीं  होती “,

“संतोष -धन  से   मिल  तो   ले   एक   बार ‘, ‘ सारा  नशा  उड़  जाएगा  तेरा ” | 

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