Home कविताएं “समाज के वातावरण से कुछ छंद “

“समाज के वातावरण से कुछ छंद “

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[1]

‘हम  दुनियाँ  को  भुला  देंगे  आपके  खातिर ‘,
‘भुला देने की कशिश  है , दीदार  में  तेरे प्रभु ‘ |

[2]

‘दोस्तों  में  रिस्ते  मत  ढूंढो ‘,’  रिस्तों  में   दोस्त  ढूंढो  ‘, ‘  जिंदगी  बन  जाएगी  ‘,
‘बूढ़े बाप  से  प्यार  से  मिलो,’ ‘हमसफर  दोस्त  की  खुशबू  मिल  जाएगी  उसमें “|

[3]

‘गलत  होते  हुए  भी  समर्पण  करना’,’पूरी  ईमानदारी  कहाती  है’ ,
‘ शक  के  घेरे  में  हो  फिर  समर्पण  ‘, ‘ तुम्हारी  समझदारी  होगी ‘ ,
‘लेकिन आप सही हैं फिर भी समर्पण’,’रिस्ते बचाने की कवायद है’ ,
‘ क्या  सोच  कर  समर्पण  किया  तूने  ? ‘ कुछ  तो   बता  जाओ  ‘

[4]

‘ दूसरे  को  उन्नत   देख  द्वेष  भावना  कलूषित  होती  जा  रही  है  ‘,
‘अब दियासलाई की जरूरत खतम ,जब आदमी आदमी से जलता है “|

[5]

‘कोई  भी  सच्चा  इंसान  प्रसंशा  का  मोहताज  नहीं  होता ‘,
‘ईमानदारी  से  बताओ  क्या  फूल  को  इत्र  की  जरूरत  है ‘ |

[6]

‘ जितनी  वफा  करते  हैं ‘ ,  मोहब्बत  उतनी  खफा  क्यों  है  ‘ ?
‘शायद कंजर्फ बहुत मिलते हैं वफा का अहसास होने नहीं देते ‘|

[7]

‘ पहले   कुछ  कमाओ ‘ ‘ फिर  कुछ  बचाओ  ‘ ,’  बाकी   में   घर   का  खर्चा  चलाओ  दोस्तों’ ,
‘अगर  कमाई  अठन्नी  और  खर्च  रुपया  कर  लिया’ ‘तो  लेने  के  देने  पड  जाएंगे  तुझको ‘|

[8]

‘कोई अपने कंधे पर सिर नहीं रखता’ ,’ न खुद के गले लग सकता है’ ,
‘आओ ‘ !’ उन अपनों को तलाशे जो’ ,’ दोनों काम करने में माहिर हों ‘ |

[9]

कोई अल्फ़ाज़ नहीं समझता तो’ ‘कोई जज़्बात तो कोई ‘हालात’ से बेखबर होते हैं’ ,
‘कोई तो एक पन्ना नहीं पढ़ पाता’ ,’ कोई पूरी किताब का मज़मून समझ  लेते  हैं “|

[10]

‘आलीशान महल तो बना लोगे’ ‘किसी के दिल में जगह बना कर दिखा’ ,
‘अनेकों आयामों से गुजरना होगा ‘,’ जगह बने या न बने’ ,’ गारंटी नहीं’ |

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