Home Uncategorized ‘सबका झुककर सत्कार’ ,’कुरीतियों का बहिष्कार’, ‘नफरत का तिरस्कार ‘ ध्यान रखिए जनाब |

‘सबका झुककर सत्कार’ ,’कुरीतियों का बहिष्कार’, ‘नफरत का तिरस्कार ‘ ध्यान रखिए जनाब |

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जरा सोचो
सबका झुककर सत्कार, कुरीतियों का बहिष्कार , नफरत का तिरस्कार ,

राम गुणौं का अंगीकार , स्नेह की बौछार,का ‘नाम’ ही ‘असली दिवाली’ है !

[2]

जरा सोचो
‘अभिमान’ में सब गया ‘दौलत’, ‘इज्जत’,’वंश’,
नहीं मानो तो’ देख’ लो, ‘कौरव’, ‘रावण’, ‘कंस’ !

[3]

जरा सोचो
‘ साहूकार’ ‘सोना’ खरीदता  है,’ गरीब’ को ‘सोने के स्थान’ की तलाश,
जीवन  के ‘गजब  के  फंडे’  हैं, ‘कहीं  खुशी  कहीं  गम’ दिखाई  देते  हैं’

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जरा सोचो
‘दिल’ दुखाने  वालों  को ‘बड़ी सहजता’  से ‘क्षमा’ कर दिया,
‘ यू’- ‘फफूलों पर मरहम’ लगाकर, ‘मन’ बहला लिया हमने’ !

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मेरा विचार :-
” आपके  चेहरे  की  मुस्कराहट  संसार  की  सर्वोत्तम  विधा  है  | कृपया  इसे  सदा  अपने  पास  बनाए  रक्खें  |
जीवन  के  अनेक  अनछुए  पहलू  हैं  जो  आपको  परेशानियों  से  बचा  कर  रक्खेंगे  ” |
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 जरा सोचो
‘छुप’ जाओ ‘अंधेरों’ आज ‘छुप’ जाओ यही अच्छा  है  तुम्हारे लिए,
पूरे देश में आज ‘दीपावली’ पधारी है ‘जगमग’ करने के लिए हमको !
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जरा सोचो
जिसे  ‘सब कुछ’  मिला  वह  ‘भाग्यशाली’  है  , ऐसा  कुछ  भी  नहीं ,
‘भाग्यशाली’ तो वह है जो हर ‘शै:’ को ‘अच्छा’ बना कर ‘मानव सेवा’ करें !
[8]
‘राधा ने कृष्ण को कभी  नहीं बांधा, ‘फिर भी खिंचे चले आए ‘,
‘कुछ  जताने  की  कोशिश  नहीं , ‘यही  प्रेम  की पराकाष्ठा  है ‘|
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“प्रभु !  सबकी  कामना  पूरी  करें” ,” ऐसा  तेरा  सच्चा  दरबार  है ” ,
” मैं  नहीं  कहता  सभी  कि  जुबां  पर  है ” “,तू  यारों  का  यार  है ” |
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‘दादा-दादी’ के लिए ‘पोते-पोतियाँ”आक्सीजन’ की तरह होते हैं,
‘उनका  ‘स्नेह’-  ममतामय ,मंगलमय , आनंदमय  बनाता  है ‘|
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