Home कोट्स Motivational Quotes ‘सपनों’ को ‘हकीकत’ मे ‘तब्दील’ करने को ‘काबलियत’ कहते हैं | ‘जीवन की हकीकत’ बयान करते ‘जीवनोपयोगी छंद’ |

‘सपनों’ को ‘हकीकत’ मे ‘तब्दील’ करने को ‘काबलियत’ कहते हैं | ‘जीवन की हकीकत’ बयान करते ‘जीवनोपयोगी छंद’ |

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[1]

जरा सोचो
‘अच्छे  सपने’  को  ‘हकीकत’  में  ‘तब्दील’  कर  डाले,’ काबिलियत’  कहते  हैं उसे,
देश  के  नौजवानों  !  इस  गजब  के  ‘ जज्बे ‘  को , ‘ टूटने ‘  मत  देना !

[2]

जरा सोचो
‘बात’  चाहे  ‘मीठी’  हो  या  ‘कड़वी’  ‘हंसकर’ ही  बोल  दो,
जो  ‘ बात ‘  हजम  ना  हो , उसे  कल  पर  ही  ‘ टाल ‘  दो !

[3]

जरा सोचो
‘इंसानियत’  के  साथ  ‘मौसम’  ‘गुस्ताखियां’  कर  रहा  है  आजकल,
‘संयमी’ और ‘साहसी’ बन कर, ‘मुकाबला’  करने  की  कोशिश  तो  कर. !

[4]

जरा सोचो
जल्दी  ‘उतार चढ़ाव’ को  संजोये  ‘स्नेह’, ‘स्नेह’  की  श्रेणी  नहीं  होती,
ह्रदय  का ‘अघट  प्रेम’  ही  ‘ मानव  को  मानव ‘ बनाए  रखता  है !

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जरा सोचो
हर  बात  की  ‘शिकायत’ निरर्थक  है, ‘दोषारोपण’  से  भला  नहीं  होगा,
‘न्याय  पर  उंगली’  उठाने  से  पहले, ‘खुद  पर  उंगली’ उठा  कर  देख  लो !

[6]

जरा सोचो
जब  ‘ असफलता ‘ और ‘ निराशा ‘  घेरे  हो , ‘ मन ‘  अस्थिर  हो ,
खुद  पर ‘विश्वास’ जगाओ, ‘अनुकूल  अवस्था’  निर्मित करो,’ जी’ जाओगे !

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जरा सोचो
‘आपसदारी’  ‘बचानी  और  निभानी’  है  या  ‘दो- फाड’  का  इरादा  है,
‘सर्जन’ बनने  में  25 वर्ष  लगते  हैं , ‘विसर्जन ‘ ‘दो पलों’ का  खेल  है !

[8]

जरा सोचो
मैं  कभी ‘कुढता’ नहीं,  दूसरों  की ‘बदजुबानी ‘ हजम  कर  लेता  हूं,
‘ सर्वोत्तम  सोच ‘  का  मालिक  हूं , ‘ स्नेहाकांक्षी ‘  प्राणी  हूं  !

[9]

जरा सोचो
काम , क्रोध , वश  में  किया ,  ‘ दीन-हीन ‘  की  ‘ सेवा ‘,
लोग  ‘सज्जन’ कहने  लगे, ‘चाहे- और  कौन  सी ‘मेवा’ ?

[10]

जरा सोचो
क्षमाशील , सच्चा , द्वेषरहित , धैर्यपूर्ण – ‘प्राणी’ धरती  का  ‘प्रकाश’  है,
ऐसा  गौरव  एक ‘किवदंती’  है, जिससे  संसार  का  अंधकार मिटता  है !

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