Home ज़रा सोचो ” सद्भावना,हौसला ,संघर्ष, समर्पण,सुप्रयास ही क्लेश काटते हैं ‘ |

” सद्भावना,हौसला ,संघर्ष, समर्पण,सुप्रयास ही क्लेश काटते हैं ‘ |

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[1]

‘बीमार  भाइयों  को  सदभावना  से  नवाजें,  उनका  हौसला  बढ़ाएँ ‘,
‘मन , तन  स्वस्थ  रक्खें और  राम -मार्ग  को प्रशस्त  करते  करें ‘|

[2]

‘बेहिसाब  खरीद  बेच  दुःखदायी  है’ ,’जीने  नहीं  देगी  तुझे ,’
‘बस जितना  जरूरी हो  खरीदते चलो’,मूल मंत्र  ही मानो  उसे ‘|

[3]

‘हर  पर्व  पर  मंगल  गीत  गायें’ ,
‘बीमार  साथियों  को  भी  शुभकामनायें  दें,
‘तन-मन  स्वस्थ  बनाएँ  रक्खें’,
‘संघर्ष  के  प्रति  समर्पित  रहें ‘|

[4]

‘चाहे  किसी  घर  में  धन  नहीं  बरसे’,
‘कोई  रोटी  को  नहीं  तरसे ‘,
‘घर-घर  में  खुशहाली  हो’,
‘हर  पर्व  का  यही  उपहार  मानो  जी ‘|

[5]

‘असावधानी  और  अहम ‘  को  हम   स्वम   गले   लगाते   हैं ‘,
‘इन्हें त्यागो , हर  पर्व  पर सबसे  गले मिल कर जगमग रहो  ‘|

[6]

‘घर  पर  बने  व्यंजन  ‘स्वादिष्ट  और  स्वास्थ्य-वर्धक  उत्पाद  हैं ‘,
‘महमानों का स्वागत  खुद परोस  कर ‘हर  पर्व’का  पूरा  आनंद  लें’|

[7]

‘ हर  पर्व  पर  देश  में  बने  सामान  से, ‘घर  सज़ा  कर  आनंद  लें ‘,
‘देश  हित में ,’चीन  के  सामान  का  बहिष्कार’ ‘सर्व  हितकारी  है ‘|

[8]

‘अच्छा  बुरा, कीचड़  गुलाब  सब  कुछ  मिलेगा, दृष्टिकोण  शुद्ध  रखिये ,’
‘मुस्कान  का  गुलाब ‘प्रेरणा श्रोत  बन  कर  ऊंचाइयों  से  मिलवा  देगा ‘ l

[9]

‘गंदगी  से  बचने  की  सलाह  देते  ही  वो  बुरा  मान  गए,
‘चिराग  जलाने  के  प्रयास  ने  अंधेरों  को  रुला  दिया’l

[10]

‘ गलतफहमी  के  शिकार’ वातावरण  को  कलह  क्लेश  में  बदल  देते  हैँ,
‘तनावमुक्त  मस्तिष्क’, जिंदगी  की  खुशियों  को  कदमों  में  डाल  देते  हैँ ‘l

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