Home ज़रा सोचो “सत्य, विश्वास, चुनौती, व्यवहार सब कुछ स्वीकार करनी चाहिए ‘|

“सत्य, विश्वास, चुनौती, व्यवहार सब कुछ स्वीकार करनी चाहिए ‘|

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[1]

‘हर  जरूरत  पर  जागे  रहे  तो’सुख’  स्वम  मिलता  जाएगा ‘,
‘आलस्य  का  प्रसाद’ अंधकार  मेंधकेले  बिना  नहीं  रुकता ‘|

[2]

‘सत्य’  एक  अच्छे  इंसान  की  पहचान  का  पक्का  सबूत  है ‘,
‘झूठ’ फौरी  आराम  है  परं तु इसका  प्रभाव  सिर्फ  दर्द  देता  है ‘|

[3]

‘न  मस्त  रहते  हो ‘,’न  व्यस्त  रहते  हो’,
‘पस्त’  होना  निश्चित  समझ ‘,
‘चाहे  जिस  पाले  में  खटिया  बिछा,
‘रोटी’  कुछ  करके  ही  मिल  पाएगी’|

[4]

‘विश्वास’ का  दीपक  जलाए  रख ,’भटकने  की  जरूरत  नहीं ‘,
‘अकर्मा ‘  बना  रहा  तो  कौन  पालेगा  तुझे , सोचो  जरा ‘|

[5]

‘जब  चुनौतियों  से  लड़ेगा  तो  गिरेगा  भी,
‘पर  हारेगा  नहीं ‘,
‘साहस’  के  सामने  अनेकों  बार’ , 
‘पत्थर’  भी  खूब  टूटे  हैं ‘|

[6]

‘किसी  को  इज्जत  दे  या  धोखा’ ,
‘वैसा  ही  मिल  जाएगा ‘,
‘बदनियती  का  व्यवहार’ किसी  को,
‘आराम  से  सोने  नहीं  देता ‘|

[7]

‘काले  धन  के  कुबेरों  से  अब,
‘अमीरी  की  जांच  होतीं  है ‘,
‘दिले  नादां’ कितना  भी  पाक  हो ,
‘कूडे  में  डाल  देते  हैं ‘|

[8]

‘कथा  सुनाई’-‘इंसान  न  कुछ  ले  कर   आया  था  न  लेकर  जाएगा ‘,
‘कथा  समाप्त होते  ही,पंडितजी -‘सब  कुछ  ले  कर  चलते  बने’ गजब !

[9]

‘तनहाई’  अच्छी  नहीं  होती,
‘किसने  कह  दिया  जनाब ,?
‘तनहाई’  ही  हमें  हमसे  मिलाती  है ,
‘बाकी  फुर्सत  कहाँ ‘?

[10]

‘चुनाव  आते  ही  नकली  भाई-चारा,
‘जिंदा  हो  जाता  है ‘,
‘हमें  मिलजुल  कर  ही  रहने  दो ,
‘इसमें  ही  भलाई  है ‘|

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