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“संस्कारों का अभाव लगता है “!

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[1]

‘दोस्ती दिल का अहसास है ,कीमत नहीं आँकी जाती कभी ,’
‘दोस्ती वो जगमा है जो हर साज पर ,गाया नहीं जाता ‘|

[2]

बिना संस्कारों के जन्म का अध्याय , कोरे कागज सरीखा है ,’
‘आकस्मिक दुःख और व्यवधानों से बचने हेतु संस्कार जरूरी हैं ,’
‘अहित की योजना से बचने हेतु सुरक्षा व संयम का पथ चाहिए ,
‘क्रोध और बदले की भावना का जन्म,अंधकार में डूबा देगा तुझे’ |

[3]

‘प्यार के बन्धन दफन होते जा रहे हैं कब्रिस्तानों में ,’
‘पिता-पुत्र का स्नेह अंतिम पायदान पर चढ़ा लगता है ,;
”कहीं ‘पति’ बहसी तो कहीं पत्नी सुपर्णखा नज़र आती है’ ,
”अब भाई-भाई अलग रहने लगे और पडौसी कहलाने लगे “|

[4]

‘हर मौसम में भयंकर बदलाव पूरे चरमोत्कर्ष पर है’ ,
‘आशा और अरमानों’ की होली रोज़ खूब जलती है ‘,’
मर्यादा नाम की चीज खतम,बेहियाई आसमान पर है’ ,
‘यह कोई साजिश नहीं , ‘हकीकत ‘ की श्रंखला है’ |

 

 

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