Home ज़रा सोचो ‘श्रेष्ठता, शोक से न डरना, ज्यादा सुख की कामना उचित नहीं | देखें – हमारे देश के हालात |

‘श्रेष्ठता, शोक से न डरना, ज्यादा सुख की कामना उचित नहीं | देखें – हमारे देश के हालात |

0 second read
0
0
813

[1]

‘दूसरों  की  श्रेष्ठता’  धारण  करते  रहने  से, मनुष्य  गरिमामय  होता  है,
‘उत्तमता  को  विसारना’, आलस्य  व  आत्महीनता  का  परिचायक  है’ !

[2]

‘बिना  संघर्ष  किए  अगर  मिलता  रहा, तो ‘अपंग’  ही  रह  जाओगे,
‘कठिन पलों  को  स्वीकारो, यह  मजबूरी  नहीं, मजबूती  का  आधार  है’ !

[3]

‘जिसने  भी  मन  नियंत्रित  कर  लिया , ‘ उसे  ‘शोक ‘ सता  नहीं  पाया,
‘जो  कमजोर, दबा-कुचला, शोषित, समझता  रहा,’बेमौत  ही  मारा  गया’ !

[4]

‘प्रभु  कृपा  कर  दो, ‘जगत  के  सारे  सुख  मिल  जाएं, ‘ ‘यह  उपासना  नहीं’,
‘सिंहासन  झूठे , रिश्ते – रेत  की  दीवार, भोग  तुल्य  है , ‘होश  में  आ  जा’ !

[5]

हमारे देश में [1]
‘आजकल  अपराधियों  के  सफाए  में  जुटी  पुलिस, अपराध  जगत  का  हिस्सा  बन  रहे  हैं,
‘रातो  रात  अमीर  बनने  के  लालच  में  वे  लोग , अपराधी  सरगना  के  मोहरे  बने  बैठे  हैं ,|
[2]
‘ जो  जनता  की  नजर  में  नायक  थे , खलनायक  हो  गए, 
‘ पदक  विजेता  के  भीतर  भी  आतंक  के  रक्तबीज  पाए  गए,
[3] ‘अपना  कौन  पराया  कौन’ पहचानना  बहुत  टेढ़ी  खीर  है,
‘देशभक्ति  और  हमदर्दी’  में  भी  गद्दारी, समझ  नहीं  आती,
[4] ‘देश  के ‘रक्षक  ही  भक्षक’ , गजब  हवा  है  देश  की,
‘ किस  भरोसे  देश  चलता  है , खुदा  जाने ‘ !

[6]

‘कमियां  हर  जगह  मौजूद  हैं, ‘जानकारी  और  दूर  करने  की  कवायद  चाहिए,
‘ सुझाव , अनुरोध , सिफारिश ,  और  सुधार  से  न  कतराएं , बस  आगे  बढ़ें ‘ !

[7]

‘जब  राष्ट्र  की  प्रगति  का  प्रश्न  हो, ‘देशद्रोह  की  भावना’  उचित  कहां ?
‘माहौल  कुछ  ऐसा  रहे, ‘पक्ष’ और ‘विपक्ष’ को ‘निष्पक्ष’ रहना  चाहिए’ !

[8]

हमारे देश में [ए]
भारत  बंद  का  आयोजन, हड़ताल, खुद  का  नुकसान, गाल  पर  तमाचा  है,
बैंक  आपका, रुपया  आपका, राष्ट्र  आपका, आप  ही  हड़ताल  पर, गजब |,

{बी]

अस्पताल ,डॉक्टर ,नर्स, आपके, कॉलेज, शिक्षक, छात्र आपके, आप हड़ताल पर,

मकान, दुकान, मेज, कुर्सी आपकी, फिर भी खुंदकबाजी, धन्य है ऐसी देशभक्ति !

 
Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In ज़रा सोचो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

[1] जरा सोचोकुछ ही ‘प्राणी’ हैं जो सबका ‘ख्याल’ करके चलते हैं,अनेक…