Home कहानी ‘श्रद्धा से भगवान पर भरोसा रख’ -“जो भी होगा हित में ही होगा ” “एक प्रेरणादायक प्रसंग “!

‘श्रद्धा से भगवान पर भरोसा रख’ -“जो भी होगा हित में ही होगा ” “एक प्रेरणादायक प्रसंग “!

0 second read
0
0
67

एक  दिन  की   कहानी*
*भगवान्   पर   विश्वास  ।*
सुबह  से  ही  बड़ी  बैचैनी  हो  रही  थी ।  पता  नहीं  क्या  बात  थी । सौम्या  को  तैयार  करके  स्कूल  भेज  दिया  और  नहाने  चली  गयी ।                             आकर   योग  की  तैयारी  कर  के  योग  करने  जाने  ही  वाली  थी  कि  पतिदेव  आये  और  बोले  –  यार  जल्दी  नास्ता  बना  दो ।   आज                                बॉस   ने  जल्दी  बुलाया  है ।  लंच  वही  कर  लूंगा ।  मैंने  पूछा  –  इतनी  जल्दी  ?  हाँ  यार  ,  कोई  जरूरी  मीटिंग  है  कह  कर  वो  नहाने                                 चले  गए । पता  नहीं  क्यों  बैचैनी  ज्यादा  हो  रही  थी ।  बड़े  ही  अनमने  मन  से  नाश्ता  बनाया ।  ये  खा  कर   ऑफिस  के  लिए  निकल                              गए ।

जल्दी  से  सब  रख कर  हाथ  पाँव  धोये  और  भागी  शिव  बाबा  के  कमरे  की  तरफ  ।  मेरे  बाबा !  मेरे  सबसे  अच्छे  दोस्त !  उनसे  अपने                            मन  की  हर  बात  कह  देती  हूं  मैं ।  फिर  डर  नहीं  लगता ।  जैसे  उन्होंने  सब  संभाल  लिया  हो ।  प्रभु  बड़ा  डर  लग  रहा  है ।   आप   ही                         बताओ   न  क्या  बात  है  ?  ऐसा  डर  तो  कभी  नहीं  लगता ।  वैसे  *  आप  हो  तो  काहे  की  चिंता  ?*  सबका  भला  करना  प्रभु ! हम  सब                             पर  कृपा  बनाये  रखना !!  याद  में  जाने  खो  सी  जाती  हूं  मैं ।  योग  करने  के  बाद  घर  के  काम  निपटाने  मे  लग  गयी ।  जैसे  सब  ठीक                            हो  गया  हो । बड़ा  हल्का  महसूस  कर  रही  थी ।
थोड़ी  ही  देर  में  दरवाजे  की  घंटी  बजी ।  देखा  तो  पड़ोस  वाली  आंटी  अंकल  बड़े  परेशान  से  खड़े  थे ।  आइये  आइये ,  अंदर  आइये   ना –                         मैंने  कहा ।  पर  उन्होंने  कहा  आज  रवि  ( यानि  मेरे  पति )  मिला  था ।  कह  रहा  था  जरूरी  काम  है ।  सुबह  8:30  की  ट्रैन  पकड़ने  वाला  था।
जी  अंकल ,  पर  बात  क्या  है  ? –  मैंने  घबराते  हुए  पूछा ।  आंटी  अचानक  ही  रोने  लगी  बोली  उस  लोकल  में  तो  बम  ब्लास्ट  हो  गया  है ।                    कोई  नहीं  बचा ।  मेरे  आसपास  तो  अँधेरा  ही  अँधेरा  छा  गया ।  मेरी  क्या  हालत  थी ,  शव्दों  में  बयान  नहीं  कर  पा  रही  हूँ ।
सीधे  दौड़ते  हुए  बाबा  के  पास  गयी ।  उन्हें  देखा  तो  लगा  ऐसा  नहीं  हो  सकता ।  बस  वही  बैठे  बैठे  बाबा  बाबा  करने  लगी ।
तभी  मेरा  मोबाइल  बजा  जो  आंटी  ने  उठाया  और  ख़ुशी  से  चिल्लायी  –  बेटा  रवि  का  फ़ोन  है  ।  वो  ठीक  है ।
मैंने  आँख  खोल  कर  बाबा  जी  को  देखा ।  लगा  वो  मुस्कुरा  रहे  हैं ।  मैं   भी  मुस्कुरा  दी ।  इनकी  आवाज  कानो  में  पड़ी  तो  लगा  जैसे  अभी                        अभी   प्यार  हो  गया  हो ।  आप  बस  जल्दी  आ  जाइए  –  इतना  ही  बोल  पायी ।
ये  घर  आये  तो  मैं  ऐसे  गले  लगी  जैसे  किसी  का  लिहाज  ही  न  हो ।  थोड़ी  देर  में  अंकल  ने  पूछा  –  हुआ  क्या  था  बेटा ,  तुम  ट्रैन  में  नहीं                    गए  क्या ?
नहीं  अंकल ,  बस  यही  मोड़  पर  एक  बहुत  ही  सुन्दर  लड़का  मिल  गया ।  साथ  साथ  चल  रहा  था ।  मैंने  पूछा  –  कहाँ  रहते  हो  ?  पहले  तो                 कभी  नहीं  देखा  तुमको  ?  कहने  लगा  –  यहीं  तो  रहता  हूँ ।  आप  कहाँ  रहते  हो  ?  मैंने  बताया  कि  मैं  शिवम्  बिल्डिंग  में  रहता  हूं  । ऑफिस                     का  भी  बताया ।  उसने  बताया  कि  वो  मेरे  ऑफिस  के  पास  ही  जा  रहा  है  ।  लेकिन  टैक्सी  से ।  और  कहने  लगा  – * आप  भी  क्यों  नहीं                          चलते  मेरे  साथ  ?*  मैंने  कहा  –  नहीं ,  थैंक्यू  ।  मैं  ट्रैन  से  जाता  हूं  ।  अब  वो  ज़िद  करने  लगा ।  बोला  मुझे  अच्छा  लगेगा  अगर  आप  चलेंगे                 तो ।  वैसे  भी  टैक्सी  जा  तो  रही  है  न  उस  तरफ ।  मैंने  भी  सोचा  चलो  ठीक  है ।  आज  टैक्सी  से  सही ।  कम  से  कम  ट्रैन  की  धक्का  मुक्की                  से  तो  बचूंगा ।  और  हम  लोगो  ने  एक  टैक्सी  कर  ली ।
मुझे  देखकर   ये  बोले  –  यामिनी ,  पता  नहीं  क्या  जादू  था  उस  लड़के  में  की  बस  मैं  खिंचा  चला  जा  रहा  था ।  बहुत  ही  प्यारा  था  वो ।   आज           जैसा  मुझे  पहले  कभी  नहीं  लगा ।
मैं  भागी  बाबा  की  तरफ  ।   मेरे   सबसे   अच्छे   दोस्त   ने   आज   मेरे   पति   के   साथ   साथ   मेरी   जान   जो   बचा   ली   थी  ।   वो   अभी   भी            मुस्कुरा   रहे   थे।

🌹 “ये   है   बाबा   के   प्रेम   की   शक्ति ।  । ओम्   शान्ति   जी🌹
ये   है   किसी   का   अनुभव   जो   मैने   आपके   साथ   शेयर   किया   है  ।

Load More Related Articles
Load More By Tarachand Kansal
Load More In कहानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘ कुछ जीवन का इत्र छिड्को , आनंद से भर जाओगे ‘|

[1] ‘अपनों  में  सही  अपनों  को  ढूँढना, ‘बहुत  मुस्किल  काम  है ‘, R…