Home ज़रा सोचो ” वक्त के अनुसार खुद को ढाल लेना सदा उत्तम ” मेरी सोच से जुड़िये |

” वक्त के अनुसार खुद को ढाल लेना सदा उत्तम ” मेरी सोच से जुड़िये |

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मेरी सोच
” प्राणियों में जीवन शक्ति का संचार तभी होगा जब हम अपनी
त्रुटियों , भूलों, न्यूनताओं को दूर करेंगे ! ‘भाग्यशाली’ नहीं
‘कर्मकार’ बने रहने का प्रयास ही सार्थक प्रयास है ” !
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जरा सोचो
‘परिस्थितियां’ भयानक थी, ‘भटक’ गए, ‘सुधर’ भी जाएंगे,
‘शायद बचपन से ‘परिवेश’ छिन्न-भिन्न था, ‘संभल’ नहीं पाए’ !
[3]
जरा सोचो
‘क्रोध’ में ‘उत्तर’, ‘दुख’ में ‘निर्णय’ दोनों ‘नींद’ उड़ा देंगे,
‘खुशी’ में ‘गुब्बारा’ बनना भी, ‘शोभा:’ नहीं देता जनाब’ !
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”सूरज का प्रकाश’और ‘फूलों से खुशबू ”मिलती रहे सबको’,
‘मेरी दुआ है ‘देश का हर लाड़ला खुशियों से लबालब रहे ‘|
[5]
‘फूलों से हाथ मिलाया तो महकने लगा,
‘मदिरा को गले लगाया तो बहकने लगा,
‘मानव से स्नेह बढ़ाया तो सुधरने लगा,
‘देश-प्रेम में डूबा तो सूरज सा चमकने लगा ‘|
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जरा सोचो
‘ समयानुसार’ जैसा मिले, स्वीकारते जाइए,
ये ‘शानदार’ जीवन का ‘असली स्वरूप’ है !
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जरा सोचो
‘बढ़ते चलो, कठिनाइयां आएंगी ,सुलझती भी जाएंगी ,
‘रुके’ तो तुझे ‘कांटा’ समझ, एक तरफ करते जाएंगे सारे’ !
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जरा सोचो
‘कम पढ़े’ हलवा खायें, ‘पढ़े-लिखे’ नमकीन,
‘यह ‘व्यवस्था’ देख देश की, सब रहते ‘गमगीन’ !
[9]
जरा सोचो
हमारे ‘दोष’ सदा हमारे ‘कर्मों ‘ के अनुसार ही ‘उभरते’ हैं,
जैसे ‘बीज’ डालेंगे वैसा ही ‘फल’ मिल जाएगा सबको’ !
[10]
प्रभु उवाच
‘छप्पन भोग’ लगा कर मुझे ‘रिझाने’ में लगा रहता है,
‘भूखे’ को  दो ‘रोटी’ खिला देता, बिना मांगे भी ‘मिल’ जाता’ !
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